Shiv Sena (UBT) ने शिंदे गुट के साथ सांसदों के विलय को Lok Sabha Speaker की मान्यता को चुनौती दी

Shiv Sena (UBT) गुट ने Supreme Court का रुख किया है, जिसमें Lok Sabha Speaker ओम बिरला के अपने छह सांसदों के प्रतिद्वंद्वी एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली Shiv Sena के साथ विलय को मान्यता देने के फैसले को चुनौती दी गई है। Shiv Sena (UBT) नेता अरविंद गणपत सावंत का प्रतिनिधित्व कर रहे Senior Advocate देवदत्त कामत ने तत्काल सुनवाई की मांग की, यह तर्क देते हुए कि Speaker के फैसले ने संसद में पार्टी के कामकाज को ठप कर दिया है। याचिका में तर्क दिया गया है कि विलय असंवैधानिक और अवैध है, क्योंकि सांसदों ने Shiv Sena (UBT) के प्रतीक और मंच पर चुनाव लड़ा था, और उनका दलबदल मतदाताओं के जनादेश को कमजोर करता है।

मुख्य बिंदु

  • Shiv Sena (UBT) ने Lok Sabha Speaker द्वारा अपने छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट के साथ विलय को मान्यता देने को चुनौती दी है।
  • याचिकाकर्ता का तर्क है कि विलय असंवैधानिक है और इसने पार्टी के संसदीय कामकाज को रोक दिया है।
  • सांसदों ने Shiv Sena (UBT) के प्रतीक पर चुनाव जीता था, और उनके दलबदल को मतदाताओं के जनादेश का विश्वासघात माना जाता है।
  • Supreme Court से इस मामले पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया गया है।
  • याचिका राजनीतिक दलबदल और पार्टी की अखंडता और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर उनके प्रभाव के मुद्दे पर प्रकाश डालती है।

परीक्षा तथ्य

  • Lok Sabha Speaker: ओम बिरला।
  • याचिकाकर्ता: अरविंद गणपत सावंत (Shiv Sena UBT नेता)।
  • विलय में शामिल छह Shiv Sena (UBT) सांसद।
  • Supreme Court बेंच की अध्यक्षता Chief Justice of India (CJI) Surya Kant कर रहे हैं।

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