SC इंटरसेक्स व्यक्तियों को एक अलग वर्ग के रूप में मान्यता देने की याचिका पर विचार करेगा

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से एक याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें इंटरसेक्स व्यक्तियों को एक अलग और पहचान योग्य वर्ग के रूप में मान्यता देने की वकालत की गई है। अधिवक्ता Shamshravish Rein द्वारा दायर याचिका में केंद्र सरकार को छह महीने के भीतर अलग वैधानिक दिशानिर्देश स्थापित करने का निर्देश देने की मांग की गई है। ये दिशानिर्देश जन्म से ही यौन विशेषताओं (DSD) में जन्मजात भिन्नताओं वाले व्यक्तियों के लिए विशिष्ट पहचान, सुरक्षा और सकारात्मक समर्थन प्रदान करेंगे। याचिका इंटरसेक्स बच्चों द्वारा सामना की जाने वाली दर्दनाक चुनौतियों पर प्रकाश डालती है, जिसमें जबरन चिकित्सा हस्तक्षेप, सामाजिक परित्याग और लिंग की सख्ती से द्विआधारी समझ के कारण विभिन्न सामाजिक संरचनाओं से बहिष्करण शामिल है।

मुख्य बिंदु

  • सुप्रीम कोर्ट इंटरसेक्स व्यक्तियों को अलग पहचान देने की याचिका पर विचार कर रहा है।
  • याचिका में Differences of Sex Development (DSD) वाले व्यक्तियों के लिए सुरक्षा और सकारात्मक समर्थन हेतु वैधानिक दिशानिर्देशों की मांग की गई है।
  • इंटरसेक्स व्यक्तियों को अद्वितीय चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिनमें जबरन चिकित्सा हस्तक्षेप और सामाजिक बहिष्करण शामिल है।
  • याचिका इस बात पर जोर देती है कि इंटरसेक्स जन्म से ही एक जैविक वास्तविकता है, जो लिंग पहचान के गठन से अलग है।
  • याचिका अदालत से सरकार को Intersex Care के लिए एक National Medical Protocol Committee बनाने का निर्देश देने का आग्रह करती है।

परीक्षा तथ्य

  • याचिका अधिवक्ता Shamshravish Rein ने दायर की।
  • भारत के Chief Justice Surya Kant की अध्यक्षता वाली बेंच।
  • DSD का अर्थ Differences of Sex Development है।
  • याचिका में छह महीने के भीतर दिशानिर्देशों का अनुरोध किया गया है।

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