Strait of Hormuz और परमाणु समझौते को लेकर US-ईरान तनाव बढ़ा

US और ईरान के बीच तनाव काफी बढ़ गया है, खासकर Strait of Hormuz को लेकर, जो एक महत्वपूर्ण तेल पारगमन choke point है। 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) से हटने के बाद शुरू किए गए US के 'maximum pressure' अभियान के कारण ईरान ने सहमत सीमाओं से परे यूरेनियम संवर्धन करके और टैंकरों को जब्त करके जवाबी कार्रवाई की है। इसने सैन्य टकराव के डर को बढ़ा दिया है और वैश्विक तेल बाजारों को बाधित किया है। सऊदी अरब और UAE जैसे क्षेत्रीय खिलाड़ी बीच में फंसे हुए हैं, जबकि यूरोपीय शक्तियाँ तनाव कम करने के लिए संघर्ष कर रही हैं। यह स्थिति खाड़ी सुरक्षा की नाजुकता और परस्पर विरोधी हितों तथा एक 'shipwrecked' अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के बीच एक राजनयिक समाधान खोजने की चुनौतियों को रेखांकित करती है।

मुख्य बिंदु

  • US-ईरान तनाव बढ़ गया है, मुख्य रूप से Strait of Hormuz और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर।
  • JCPOA से हटने के बाद US के 'maximum pressure' अभियान ने ईरान की जवाबी कार्रवाइयों को प्रेरित किया है, जिसमें यूरेनियम संवर्धन और टैंकरों की जब्ती शामिल है।
  • बढ़ता संघर्ष क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण खतरा पैदा करता है।
  • क्षेत्रीय और वैश्विक हितों के जटिल अंतर्संबंध के कारण स्थिति को कम करने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
  • यह लेख अंतरराष्ट्रीय संबंधों और मौजूदा वैश्विक व्यवस्था के लिए व्यापक निहितार्थों पर प्रकाश डालता है।

परीक्षा तथ्य

  • Strait of Hormuz तेल शिपमेंट के लिए एक महत्वपूर्ण chokepoint है।
  • US 2018 में Joint Comprehensive Plan of Action (JCPOA), 2015 के ईरान परमाणु समझौते से हट गया।
  • ईरान ने US प्रतिबंधों के जवाब में अपने यूरेनियम संवर्धन को 20% शुद्धता तक बढ़ा दिया है।
  • US ने क्षेत्र में एक carrier strike group सहित अतिरिक्त सैन्य संपत्ति तैनात की है।

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