मद्रास उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया: इस्लाम में परिवर्तित होने वाले पिछड़े वर्ग मुस्लिम का दर्जा नहीं पा सकते
मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने एक 2024 के सरकारी आदेश (G.O.) को असंवैधानिक घोषित कर दिया, जो इस्लाम में परिवर्तित होने वालों को पिछड़ा वर्ग (BC) का दर्जा प्राप्त करने की अनुमति देता था। अदालत ने अपने 1951 के फैसले को दोहराया, जिसमें कहा गया था कि इस्लाम में परिवर्तित होने वाला हिंदू 'सिर्फ एक मुसलमान' बन जाता है और मुस्लिम समाज में अपनी पिछली जाति की स्थिति खो देता है, जिसे समतावादी माना जाता है। इस फैसले ने शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत पर जोर दिया, यह कहते हुए कि सरकारी आदेश अदालत के अंतिम निर्णय को ओवरराइड नहीं कर सकता। अदालत ने विभिन्न जाति के धर्मांतरितों को BC मुस्लिम श्रेणियों में समायोजित करने में सरकारी आदेश की मनमानी को भी नोट किया।
मुख्य बिंदु
- मद्रास उच्च न्यायालय ने 2024 के एक सरकारी आदेश (G.O.) को रद्द कर दिया, जो इस्लाम में परिवर्तित होने वालों को पिछड़ा वर्ग मुस्लिम का दर्जा प्राप्त करने की अनुमति देता था।
- अदालत ने अपने 1951 के फैसले को दोहराया कि इस्लाम में परिवर्तित होने वाला हिंदू 'सिर्फ एक मुसलमान' बन जाता है और पिछली जाति की पहचान खो देता है, क्योंकि इस्लाम एक समतावादी समाज को बढ़ावा देता है।
- फैसले ने शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत को रेखांकित किया, जिसमें कहा गया कि सरकारी आदेश अदालती फैसलों को रद्द नहीं कर सकते।
- अदालत ने पाया कि सरकारी आदेश विभिन्न जाति के धर्मांतरितों को BC मुस्लिम श्रेणियों में वर्गीकृत करने में मनमाना था, जो सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का खंडन करता है।
परीक्षा तथ्य
- मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने यह फैसला सुनाया।
- एक 2024 के सरकारी आदेश (G.O.) को असंवैधानिक घोषित किया गया।
- फैसले में मद्रास उच्च न्यायालय के 1951 के फैसले का हवाला दिया गया।
- न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन और पी.बी. बालाजी ने फैसला सुनाया।
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