पश्चिमी घाट संरक्षण: दक्षिणी राज्यों को गतिरोध तोड़ना चाहिए
यह लेख दक्षिणी राज्यों के लिए Western Ghats, एक UNESCO World Heritage Site, के संरक्षण पर गतिरोध को हल करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर देता है। Gadgil और Kasturirangan जैसी समितियों की सिफारिशों के बावजूद, राज्य पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (ESAs) की सीमा और नियामक ढाँचे पर सहमत होने में विफल रहे हैं। यह देरी घाटों की जैव विविधता और पारिस्थितिक सेवाओं को खतरा है, जो क्षेत्र की जल सुरक्षा और जलवायु विनियमन के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह लेख संरक्षण को टिकाऊ विकास के साथ संतुलित करते हुए एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण का आह्वान करता है, और राज्यों से इस महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए अल्पकालिक आर्थिक हितों पर दीर्घकालिक पारिस्थितिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने का आग्रह करता है।
मुख्य बिंदु
- दक्षिणी राज्यों को Western Ghats, एक UNESCO World Heritage Site, की रक्षा पर गतिरोध को हल करना चाहिए।
- समिति की सिफारिशों के बावजूद पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों (ESAs) और नियामक ढाँचे पर समझौते की कमी बनी हुई है।
- संरक्षण में देरी घाटों की जैव विविधता और पारिस्थितिक सेवाओं को खतरा है।
- Western Ghats क्षेत्र में जल सुरक्षा और जलवायु विनियमन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- इस पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए संरक्षण और टिकाऊ विकास को संतुलित करने वाला एक सहयोगात्मक दृष्टिकोण आवश्यक है।
परीक्षा तथ्य
- Western Ghats एक UNESCO World Heritage Site हैं।
- Gadgil Committee (Western Ghats Ecology Expert Panel - WGEEP) और Kasturirangan Committee (High-Level Working Group - HLWG) की रिपोर्टों का उल्लेख है।
- लेख Ecologically Sensitive Areas (ESAs) को संदर्भित करता है।
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