म्यांमार के साथ भारत का जुड़ाव: द्विपक्षीय संबंधों में कनेक्टिविटी, सुरक्षा और चीन कारक
यह लेख म्यांमार के साथ भारत के व्यावहारिक जुड़ाव पर चर्चा करता है, जिसे राष्ट्रपति U Min Aung Hlaing की भारत यात्रा ने उजागर किया है। म्यांमार के सैन्य शासन पर पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद, भारत म्यांमार के रणनीतिक महत्व को प्राथमिकता देता है क्योंकि यह दक्षिण पूर्व एशिया का प्रवेश द्वार है और इसकी 1,643-km लंबी साझा सीमा है, जो भारत की सुरक्षा को प्रभावित करती है। लेख Kaladan Multi-Modal Transit Transport Project और India-Myanmar-Thailand Trilateral Highway जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का विवरण देता है, जो आंतरिक संघर्षों के कारण देरी का सामना कर रही हैं। यह सुरक्षा सहयोग, व्यापार और शिक्षा पहलों पर भी प्रकाश डालता है, म्यांमार में चीन के बढ़ते प्रभाव के प्रति भारत की भूमिका पर जोर देता है।
मुख्य बिंदु
- भारत पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद म्यांमार के साथ व्यावहारिक जुड़ाव बनाए रखता है, Act East और Neighbourhood First नीतियों के लिए इसके रणनीतिक महत्व को पहचानता है।
- म्यांमार की अस्थिरता और इसकी साझा सीमा भारत के सुरक्षा हितों के लिए सीधा खतरा पैदा करती है।
- Kaladan Multi-Modal Transit Transport Project और India-Myanmar-Thailand Trilateral Highway जैसी प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाएं महत्वपूर्ण हैं लेकिन आंतरिक संघर्षों के कारण देरी का सामना कर रही हैं।
- भारत का लक्ष्य म्यांमार में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करना है, जिसने सैन्य शासन को बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण और हथियार आपूर्ति प्रदान की है।
- द्विपक्षीय सहयोग में व्यापार, विद्रोही समूहों के खिलाफ सुरक्षा आश्वासन और बढ़ी हुई शैक्षिक छात्रवृत्तियां शामिल हैं।
परीक्षा तथ्य
- म्यांमार के राष्ट्रपति: U Min Aung Hlaing।
- भारत-म्यांमार सीमा की लंबाई: 1,643-km।
- कनेक्टिविटी परियोजनाएं: Kaladan Multi-Modal Transit Transport Project, India-Myanmar-Thailand Trilateral Highway।
- द्विपक्षीय व्यापार (2025-26): $1.95 बिलियन।
- छात्रवृत्तियां: Mekong-Ganga ICCR छात्रवृत्तियां 2026 से सालाना 36 से बढ़ाकर 100 की गईं।
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