भारत की जल शासन वास्तुकला सतत आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण के लिए महत्वपूर्ण
भारत एक विरोधाभास का सामना कर रहा है: प्रचुर वार्षिक वर्षा (4,000 बिलियन क्यूबिक मीटर) लेकिन अक्षम जल संचयन, भंडारण और उपयोग के कारण महत्वपूर्ण जल संकट। देश का जल संकट केवल जलविज्ञानीय नहीं, बल्कि संस्थागत है, जिसमें प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता सालाना 5,000 से घटकर 1,400 क्यूबिक मीटर हो गई है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा भूजल उपयोगकर्ता है, जो वैश्विक निष्कर्षण का एक चौथाई हिस्सा है। शासन में संघ, राज्य और स्थानीय निकायों के साथ एक जटिल बहु-स्तरीय संरचना शामिल है। Jal Jeevan Mission, Atal Bhujal Yojana और Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana जैसी पहल का उद्देश्य जल आपूर्ति, भूजल प्रबंधन और सिंचाई दक्षता में सुधार करना है, जो एक circular water economy की ओर बढ़ रहा है।
मुख्य बिंदु
- भारत का जल संकट मुख्य रूप से संस्थागत है, जो उच्च वार्षिक वर्षा के बावजूद अक्षम जल संचयन, भंडारण और उपयोग से उत्पन्न होता है।
- प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता सालाना 5,000 से घटकर 1,400 क्यूबिक मीटर हो गई है।
- भारत दुनिया का सबसे बड़ा भूजल उपयोगकर्ता है, जो वैश्विक निष्कर्षण का लगभग एक चौथाई हिस्सा है।
- जल शासन में संघ, राज्य और स्थानीय सरकारों के बीच साझा जिम्मेदारियों के साथ एक जटिल बहु-स्तरीय संरचना शामिल है।
- प्रमुख पहलों में ग्रामीण नल कनेक्शन के लिए Jal Jeevan Mission, सहभागी भूजल प्रबंधन के लिए Atal Bhujal Yojana और सूक्ष्म-सिंचाई के लिए Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana शामिल हैं।
परीक्षा तथ्य
- भारत की वार्षिक वर्षा: लगभग 4,000 बिलियन क्यूबिक मीटर।
- प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता (वर्तमान): लगभग 1,400 क्यूबिक मीटर।
- वैश्विक भूजल निष्कर्षण में भारत का हिस्सा: लगभग एक चौथाई।
- प्रमुख मिशन: Jal Jeevan Mission (2019 में लॉन्च, 2028 तक विस्तारित), Atal Bhujal Yojana, Pradhan Mantri Krishi Sinchayee Yojana, Atal Mission for Rejuvenation and Urban Transformation (AMRUT), Namami Gange Programme।
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