पश्चिम एशिया युद्ध और इजरायल संबंधी भाषा ने BRICS उप विदेश मंत्रियों के संयुक्त बयान को पटरी से उतारा

नई दिल्ली में BRICS Deputy Foreign Ministers और Special Envoys की बैठक में लंबी बहस संयुक्त बयान के बिना समाप्त हुई, जो भारत की BRICS Presidency के लिए चुनौतियों का संकेत देती है। पश्चिम एशिया युद्ध को लेकर असहमति उत्पन्न हुई, जिसमें UAE और Iran के प्रतिनिधियों के बीच टकराव हुआ। इसके अतिरिक्त, भारत ने कथित तौर पर इजरायल और फिलिस्तीन पर भाषा को 'नरम' करने का प्रयास किया, विशेष रूप से गाजा और लेबनान में इजरायल की कार्रवाइयों की आलोचना और फिलिस्तीनी राजधानी के रूप में 'East Jerusalem' के संदर्भों के संबंध में, जिसका अधिकांश अन्य सदस्यों ने विरोध किया। यह आगामी BRICS बैठकों, जिसमें मई में Foreign Ministers की बैठक और सितंबर में summit शामिल है, के लिए एक कठिन मंच तैयार करता है।

मुख्य बिंदु

  • नई दिल्ली में BRICS Deputy Foreign Ministers की बैठक संयुक्त बयान जारी करने में विफल रही।
  • असहमति पश्चिम एशिया युद्ध और इजरायल और फिलिस्तीन के संबंध में इस्तेमाल की गई भाषा से उत्पन्न हुई।
  • भारत ने कथित तौर पर इजरायल की कार्रवाइयों की आलोचना को नरम करने और फिलिस्तीनी राजधानी के रूप में 'East Jerusalem' के संदर्भों को हटाने की मांग की।
  • अधिकांश अन्य BRICS सदस्यों ने भाषा में भारत के प्रस्तावित परिवर्तनों का विरोध किया।

परीक्षा तथ्य

  • बैठक: BRICS Deputy Foreign Ministers और Special Envoys की बैठक।
  • स्थान: नई दिल्ली।
  • BRICS Foreign Ministers की बैठक: 14-15 मई।
  • BRICS Summit: 10-11 सितंबर।
  • BRICS सदस्य (विस्तारित): 11 राष्ट्र।

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