दिल्ली बचपन के मोटापे और कुपोषण के साथ 'कुपोषण के दोहरे बोझ' का सामना कर रही है
दिल्ली 'Double Burden of Malnutrition' (DBM) से जूझ रही है, जहाँ बच्चे अत्यधिक कैलोरी का सेवन करते हैं लेकिन आवश्यक पोषक तत्वों की कमी होती है, जिससे अधिक वजन की स्थिति पैदा होती है। यह प्रारंभिक कुपोषण बाद के जीवन में मोटापे के लिए एक जोखिम कारक है। अध्ययनों से पता चलता है कि दिल्ली में बचपन के मोटापे का उच्च pooled prevalence है, जिसका श्रेय शहरीकरण, कम शारीरिक गतिविधि, बढ़े हुए स्क्रीन टाइम और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की ओर बदलाव को दिया जाता है। DBM अब केवल धनी समूहों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि सभी आर्थिक स्तरों और कम उम्र के समूहों को प्रभावित कर रहा है। मोटापे से ग्रस्त बच्चों को hypertension और metabolic syndrome जैसी non-communicable diseases का शुरुआती जोखिम होता है, जिसके लिए लक्षित हस्तक्षेपों की आवश्यकता है।
मुख्य बिंदु
- दिल्ली 'Double Burden of Malnutrition' (DBM) का अनुभव कर रही है, जिसकी विशेषता यह है कि बच्चे अधिक भोजन करते हैं फिर भी कुपोषित रहते हैं।
- शहरीकरण, कम शारीरिक गतिविधि और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के बढ़ते सेवन के कारण दिल्ली में बचपन का मोटापा अधिक है।
- DBM अब सभी आर्थिक स्तरों पर और छोटे बच्चों को प्रभावित कर रहा है।
- मोटापे से ग्रस्त बच्चों को hypertension और metabolic syndrome जैसी non-communicable diseases का अधिक जोखिम होता है।
परीक्षा तथ्य
- अध्ययन: 'Prevalence of Obesity among School-going Children in India: A Comprehensive Systematic Review, Meta-analysis, and Spatial No Analysis'।
- भारत में बचपन के मोटापे का उच्चतम pooled prevalence: अरुणाचल प्रदेश, उसके बाद दिल्ली।
- UNICEF विश्लेषण: 2030 तक भारत में 27 मिलियन से अधिक बच्चे/किशोर मोटापे से ग्रस्त होंगे।
- NFHS-5 (2019-2021) डेटा: NFHS-3 से अधिक वजन वाले बच्चों में 127% की वृद्धि।
पढ़ें। याद रखें। याद करें।
स्पेस्ड-रिपीटिशन फ्लैशकार्ड, दैनिक क्विज़ और ऑफ़लाइन एक्सेस पाएं — एंड्रॉइड पर मुफ़्त।