कच्चे तेल की ऊंची कीमतें आयातित मुद्रास्फीति बढ़ाएंगी और चालू खाता घाटा बढ़ाएंगी: RBI गवर्नर

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक गड़बड़ियों और आपूर्ति श्रृंखला बाधाओं के बावजूद, भारत के आर्थिक मूल सिद्धांत मजबूत बने हुए हैं। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें आयातित मुद्रास्फीति बढ़ाएंगी और Current Account Deficit (CAD) को चौड़ा करेंगी। ऊर्जा, उर्वरक और अन्य कमोडिटी बाजारों में व्यवधान उद्योग, कृषि और सेवाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं, जिससे घरेलू उत्पादन कम हो सकता है। बढ़ी हुई अनिश्चितता, बढ़ा हुआ जोखिम से बचाव और सुरक्षित ठिकाने की मांग भी घरेलू तरलता, आर्थिक गतिविधि, खपत, निवेश और वैश्विक विकास को प्रभावित कर सकती है, जिससे बाहरी मांग कम हो सकती है और प्रेषण प्रवाह कम हो सकता है। RBI डिप्टी गवर्नर पूनम गुप्ता ने विविध स्रोतों और खाड़ी क्षेत्र में प्रवासी श्रमिकों की बढ़ती मांग का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि प्रेषण में गिरावट की उम्मीद नहीं है।

मुख्य बिंदु

  • कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से आयातित मुद्रास्फीति बढ़ने और भारत का Current Account Deficit (CAD) बढ़ने की उम्मीद है।
  • ऊर्जा, उर्वरक और अन्य कमोडिटी बाजारों में व्यवधान विभिन्न घरेलू आर्थिक क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं।
  • वैश्विक अनिश्चितताएं घरेलू तरलता, आर्थिक गतिविधि और बाहरी मांग को प्रभावित कर सकती हैं।
  • विविध स्रोतों और प्रवासी श्रमिकों की बढ़ती मांग के कारण प्रेषण में गिरावट की उम्मीद नहीं है।

परीक्षा तथ्य

  • RBI गवर्नर: संजय मल्होत्रा।
  • RBI डिप्टी गवर्नर: पूनम गुप्ता।
  • कच्चे तेल की कीमतों का Current Account Deficit (CAD) पर प्रभाव।

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