MC Mehta बनाम Union of India: चार दशकों के बाद ऐतिहासिक पर्यावरणीय PIL मामला बंद
Supreme Court ने हाल ही में वाहन प्रदूषण पर ऐतिहासिक MC Mehta बनाम Union of India PIL मामले को बंद कर दिया है, जो इसकी शुरुआत के लगभग चार दशक बाद हुआ है। 1985 में शुरू हुए इस मामले के परिणामस्वरूप 1,000 से अधिक अदालती आदेश और दिल्ली के CNG सार्वजनिक परिवहन में संक्रमण सहित स्मारकीय पर्यावरणीय सुधार हुए। इसने 'continuing mandamus' के सिद्धांत को स्थापित किया, जिससे अदालत को विस्तारित अवधि के लिए कार्यकारी अनुपालन की निगरानी करने की अनुमति मिली। इस मामले ने भारत के पर्यावरणीय न्यायशास्त्र को महत्वपूर्ण रूप से आकार दिया, स्वच्छ हवा के अधिकार को Article 21 से जोड़ा। हालांकि बंद हो गया है, इसकी विरासत पर्यावरण संरक्षण में न्यायपालिका की सक्रिय भूमिका और कार्यकारी द्वारा कार्यान्वयन की चुनौतियों को रेखांकित करती है।
मुख्य बिंदु
- वाहन प्रदूषण पर MC Mehta बनाम Union of India PIL मामला, जो 1985 में शुरू हुआ था, लगभग चार दशकों के बाद बंद कर दिया गया है।
- इस मामले के परिणामस्वरूप 1,000 से अधिक अदालती आदेश और दिल्ली के CNG संक्रमण सहित ऐतिहासिक पर्यावरणीय सुधार हुए।
- इसने 'continuing mandamus' सिद्धांत को स्थापित किया, जिससे कार्यकारी अनुपालन की लंबे समय तक न्यायिक निगरानी की अनुमति मिली।
- इस मामले ने भारत के पर्यावरणीय न्यायशास्त्र को महत्वपूर्ण रूप से आकार दिया, स्वच्छ हवा को Article 21 से जोड़ा।
परीक्षा तथ्य
- यह मामला Writ Petition (Civil) No. 13029 है, जिसे दिसंबर 1985 में दायर किया गया था।
- इसके कारण दिल्ली का सार्वजनिक परिवहन CNG में परिवर्तित हो गया।
- MC Mehta को Goldman Environmental Prize (1996) और Ramon Magsaysay Award (1997) मिला।
- इस मामले ने स्वच्छ हवा के अधिकार को भारतीय संविधान के Article 21 से जोड़ा।
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