संसदीय पैनल ने शहरी बुनियादी ढांचे पर उच्च-स्तरीय विशेषज्ञ समिति की सिफारिश की
एक संसदीय स्थायी समिति ने सरकार को 2047 तक भारत की शहरी बुनियादी ढांचे की आवश्यकताओं, वित्तपोषण की जरूरतों, शासन सुधारों और क्षमता-निर्माण अनिवार्यताओं का आकलन करने के लिए एक High-Level Expert Committee गठित करने की सिफारिश की है। यह सिफारिश एक एकीकृत दीर्घकालिक शहरी निवेश और रणनीति ढांचे की अनुपस्थिति से उपजी है, जिससे खंडित योजना और संसाधन आवंटन के मुद्दे हो सकते हैं। आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने AMRUT 2.0, SBM-U 2.0, PMAY-U 2.0 और Metro Rail परियोजनाओं जैसे चल रहे मिशनों पर प्रकाश डाला, लेकिन समिति ने नोट किया कि ये बड़े पैमाने पर योजना-आधारित और क्षेत्र-विशिष्ट हैं, जिनमें एक व्यापक दृष्टिकोण का अभाव है।
मुख्य बिंदु
- एक संसदीय स्थायी समिति शहरी बुनियादी ढांचे पर एक High-Level Expert Committee की वकालत करती है।
- समिति 2047 तक शहरी बुनियादी ढांचे के लिए आवश्यकताओं, वित्तपोषण, शासन और क्षमता-निर्माण का आकलन करेगी।
- यह सिफारिश एक एकीकृत दीर्घकालिक शहरी निवेश और रणनीति ढांचे की कमी को संबोधित करती है।
- मौजूदा शहरी मिशनों को योजना-आधारित और क्षेत्र-विशिष्ट के रूप में नोट किया गया है, जिनमें एक व्यापक दृष्टिकोण का अभाव है।
परीक्षा तथ्य
- Committee recommended: शहरी बुनियादी ढांचे पर High-Level Expert Committee।
- Target year for assessment: 2047।
- Last comprehensive assessment: 2011 में High Powered Expert Committee (HPEC) (2031 तक के अनुमान)।
- Ongoing missions mentioned: AMRUT 2.0, SBM-U 2.0, PMAY-U 2.0, Metro Rail projects, PM e-Bus Seva।
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