Strait of Hormuz का रणनीतिक महत्व और वैश्विक तथा भारतीय ऊर्जा सुरक्षा पर इसका प्रभाव
Strait of Hormuz Persian Gulf को Arabian Sea से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है, जिससे दुनिया के समुद्री कच्चे तेल का एक तिहाई और वैश्विक LNG का एक चौथाई हिस्सा गुजरता है। पश्चिम एशिया में तनाव, विशेष रूप से US और ईरान से जुड़े, अक्सर शिपिंग को बाधित करते हैं और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के बारे में चिंताएं बढ़ाते हैं। भारत इस जलडमरूमध्य पर बहुत अधिक निर्भर है, इसके कच्चे तेल का लगभग दो-तिहाई और प्राकृतिक गैस आयात का आधा हिस्सा इसके माध्यम से होता है। जोखिमों को कम करने के लिए, भारत वैकल्पिक आपूर्ति मार्गों की खोज कर रहा है और घरेलू रिफाइनरियों के लिए LPG उत्पादन बढ़ाने के लिए आपातकालीन शक्तियों का आह्वान किया है।
मुख्य बिंदु
- Strait of Hormuz तेल और प्राकृतिक गैस पारगमन के लिए विश्व स्तर पर महत्वपूर्ण समुद्री चोकपॉइंट है।
- पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव सीधे जलडमरूमध्य की सुरक्षा और नौगम्यता को प्रभावित करते हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित होते हैं।
- भारत अपनी ऊर्जा आयात के लिए Strait of Hormuz पर काफी निर्भर करता है, जिससे व्यवधान इसकी ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन जाता है।
- भारत Strait of Hormuz व्यवधानों के प्रति अपनी भेद्यता को कम करने के लिए आपूर्ति मार्गों में विविधता लाने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने जैसी रणनीतियों को सक्रिय रूप से अपना रहा है।
परीक्षा तथ्य
- Strait of Hormuz अपने सबसे संकरे बिंदु पर लगभग 33 किलोमीटर चौड़ा है।
- दुनिया के समुद्री कच्चे तेल का एक तिहाई और वैश्विक LNG का एक चौथाई हिस्सा जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है।
- भारत अपने कच्चे तेल का लगभग दो-तिहाई और अपनी प्राकृतिक गैस शिपमेंट का लगभग 40% Strait of Hormuz के माध्यम से भेजता है।
- Operation Sankalp Gulf क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के लिए एक भारतीय नौसेना पहल है।
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