अध्ययन से पता चला कि सिंधु बेसिन (Indus Basin) में जल प्रवाह बढ़ रहा है जबकि गंगा बेसिन में भारी गिरावट देखी गई

'Earth’s Future' में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चलता है कि सिंधु और गंगा नदी प्रणालियाँ विपरीत हाइड्रोलॉजिकल दिशाओं में बढ़ रही हैं। 1980 और 2021 के बीच, सिंधु बेसिन में वार्षिक प्रवाह में 8% की वृद्धि हुई, जिसका मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ (western disturbances) से होने वाली बढ़ी हुई वर्षा है। इसके विपरीत, गंगा बेसिन में प्रवाह में 17% की कमी देखी गई। गंगा में गिरावट का मुख्य कारण सिंचाई के लिए गहन भूजल पंपिंग है, जिसने कुछ हिस्सों में एक्विफर्स (aquifers) और नदियों के बीच प्राकृतिक प्रवाह को उलट दिया है। इसके जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं और सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) ढांचे के तहत समन्वित भूजल विनियमन की आवश्यकता है।

मुख्य बिंदु

  • सिंधु बेसिन के प्रवाह में वृद्धि मानसून के योगदान और मुख्य नदी एवं सहायक नदियों को प्रभावित करने वाले पश्चिमी विक्षोभ से जुड़ी है।
  • गंगा बेसिन में गिरावट 60% से 80% भूजल निष्कर्षण के कारण है, विशेष रूप से कमजोर मानसून वर्षों के दौरान।
  • अध्ययन में वर्षा, भूजल और सिंचाई को जोड़ने वाले उच्च-रिज़ॉल्यूशन, भौतिकी-आधारित हाइड्रोलॉजिकल मॉडल का उपयोग किया गया।
  • कमी के कारण यमुना और ऊपरी गंगा के कुछ हिस्सों में एक्विफर्स और नदियों के बीच प्राकृतिक प्रवाह की दिशाएं उलट गई हैं।

परीक्षा तथ्य

  • अध्ययन प्रकाशन: 'Earth’s Future' (American Geophysical Union)।
  • सिंधु प्रवाह परिवर्तन: +8%; गंगा प्रवाह परिवर्तन: -17% (1980-2021)।
  • प्रमुख संधि: सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) (1960)।

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