मेघालय में अवैध Rat-Hole Mining: शासन और सुरक्षा के लिए चुनौतियां और प्रस्तावित समाधान
मेघालय में एक अवैध rat-hole mine में हाल ही में हुए विस्फोट में 18 श्रमिकों की मौत ने 2014 के National Green Tribunal (NGT) प्रतिबंध के बावजूद शासन की निरंतर विफलता को उजागर किया है। स्थानीय आर्थिक निर्भरता, खंडित स्वामित्व और कमजोर प्रवर्तन के कारण rat-hole mining प्रचलित बनी हुई है। लेख सुझाव देता है कि अवैध खनन को सामाजिक रूप से महंगा और परिचालन रूप से निषेधात्मक बनाया जाना चाहिए। प्रस्तावित समाधानों में कोयला ले जाने वाले वाहनों के लिए अनिवार्य GPS tracking, satellite और drone monitoring, और समुदाय-आधारित निगरानी शामिल है। इसके अलावा, राज्य को स्थानीय आबादी के लिए आय के प्राथमिक स्रोत के रूप में अवैध खनन को विस्थापित करने के लिए horticulture और tourism जैसे क्षेत्रों में वैकल्पिक आजीविका प्रदान करनी चाहिए।
मुख्य बिंदु
- Rat-hole mining में engineered roofs और side-wall protections की कमी होती है, जिससे यह बार-बार ढहने और घातक दुर्घटनाओं के प्रति संवेदनशील हो जाता है।
- National Green Tribunal (NGT) ने 2014 में rat-hole mining को बंद करने का आदेश दिया था, लेकिन स्थानीय संरक्षण के कारण प्रवर्तन कमजोर बना हुआ है।
- कोयले की आय पर उच्च स्थानीय निर्भरता और क्षेत्र में वैकल्पिक रोजगार के अवसरों की कमी के कारण अवैध खनन जारी है।
- कोयला परिवहन की निगरानी और अवैध गतिविधियों का प्रभावी ढंग से पता लगाने के लिए GPS tracking और satellite data जैसे तकनीकी हस्तक्षेपों की सिफारिश की गई है।
- राज्य को आपूर्ति-पक्ष के प्रोत्साहनों को खत्म करना चाहिए और अवैध ठेकेदारों के खिलाफ गवाही देने वाले श्रमिकों को माफी (amnesty) प्रदान करनी चाहिए ताकि इस चक्र को तोड़ा जा सके।
परीक्षा तथ्य
- National Green Tribunal (NGT) ने 2014 में मेघालय में rat-hole mining पर प्रतिबंध लगा दिया था।
- Mines and Minerals (Development and Regulation) (MMDR) Act अवैध खनन को रोकने के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है।
- मेघालय में 5 फरवरी को हुए विस्फोट में कम से कम 18 श्रमिकों की मौत हुई।
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