सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को Pennaiyar River जल विवाद के लिए ट्रिब्यूनल गठित करने का निर्देश दिया
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को Pennaiyar River को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच लंबे समय से चले आ रहे जल-बंटवारे विवाद के निपटारे के लिए एक महीने के भीतर ट्रिब्यूनल गठित करने का निर्देश दिया है। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच ने Inter-State River Water Disputes Act of 1956 की Section 5 का हवाला दिया। तमिलनाडु ने 2018 में कर्नाटक द्वारा बांधों और डायवर्जन संरचनाओं के निर्माण को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया था, जिसमें तर्क दिया गया था कि अंतर-राज्यीय नदी का पानी एक राष्ट्रीय संपत्ति है और कोई भी राज्य विशेष स्वामित्व का दावा नहीं कर सकता है। अदालत ने एक औपचारिक न्यायिक निकाय की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य बिंदु
- केंद्र को 30 दिनों के भीतर ट्रिब्यूनल के गठन के लिए अधिसूचना जारी करनी होगी।
- विवाद नई संरचनाओं के माध्यम से Pennaiyar river के पानी के कर्नाटक द्वारा एकतरफा उपयोग पर तमिलनाडु की आपत्ति पर केंद्रित है।
- अदालत का निर्देश Inter-State River Water Disputes Act, 1956 पर आधारित है।
- तमिलनाडु ने राज्यों के बीच जल बंटवारे के लिए 1892 के समझौते को वैध और बाध्यकारी बताया।
परीक्षा तथ्य
- Inter-State River Water Disputes Act of 1956 (Section 5)।
- ट्रिब्यूनल गठन की समय सीमा: 1 महीना।
- शामिल राज्य: तमिलनाडु और कर्नाटक।
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