भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का महत्व और चुनौतियाँ
भारत और यूरोपीय संघ (EU) एक व्यापक Free Trade Agreement (FTA) पर बातचीत कर रहे हैं, जिसे संयुक्त $24 ट्रिलियन बाजार आकार के कारण अक्सर 'सभी सौदों की जननी' कहा जाता है। इस सौदे का उद्देश्य भारत के निर्यात मूल्य के 90% से अधिक पर शुल्कों को समाप्त करना है, जिससे वस्त्र, रत्न और पारंपरिक चिकित्सा (AYUSH) जैसे क्षेत्रों को लाभ होगा। हालांकि, EU के Carbon Border Adjustment Mechanism (CBAM) और बीफ तथा डेयरी जैसे संवेदनशील कृषि उत्पादों पर भारत की 'red lines' सहित महत्वपूर्ण बाधाएँ बनी हुई हैं। यह समझौता यूरोपीय पूंजी को आकर्षित करने और द्विपक्षीय सेवाओं के व्यापार को बढ़ाने के लिए भारत के निवेश माहौल में सुधार करना भी चाहता है।
मुख्य बिंदु
- FTA लगभग ₹2,091.6 लाख करोड़ ($24 ट्रिलियन) के संयुक्त बाजार आकार को कवर करता है।
- सौदे के लागू होते ही EU से लगभग 70.4% टैरिफ लाइनों पर शुल्क समाप्त करने की उम्मीद है।
- भारत ने बीफ, डेयरी और कुछ कृषि उत्पादों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को सौदे के दायरे से बाहर रखा है।
- भारत के लिए एक बड़ी चिंता EU का Carbon Border Adjustment Mechanism (CBAM) है, जो आयात पर कार्बन टैक्स के रूप में कार्य करता है।
परीक्षा तथ्य
- भारत और EU के बीच द्विपक्षीय व्यापार 2024-25 में $136.54 बिलियन रहा।
- इस सौदे का लक्ष्य कैलेंडर वर्ष 2026 में लागू होना है।
- AYUSH चिकित्सक नए नियमों के तहत EU में सेवाएँ प्रदान करने में सक्षम हो सकते हैं।
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