सरकार ने लघु-स्तरीय दवा अनुसंधान के लिए अनिवार्य परीक्षण लाइसेंस समाप्त किए
केंद्र सरकार ने गैर-व्यावसायिक दवा निर्माण के लिए अनिवार्य लाइसेंस आवश्यकताओं को 'पूर्व-सूचना तंत्र' (prior-intimation mechanism) से बदलने के लिए New Drugs and Clinical Trials Rules, 2019 में संशोधन किया है। इस कदम का उद्देश्य 'ease of doing business' को सुगम बनाना और दवा विकास को तीन महीने तक तेज करना है। डेवलपर्स अब SUGAM पोर्टल के माध्यम से Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO) को सूचित करने के बाद अनुसंधान के लिए कम मात्रा में निर्माण कर सकते हैं। जबकि उद्योग 'लाइसेंस राज' में कमी का स्वागत करता है, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि नियमों को हटाने से गुणवत्ता नियंत्रण के साथ समझौता नहीं होना चाहिए, और घटिया कफ सिरप से जुड़ी हालिया घातक घटनाओं का हवाला दिया है।
मुख्य बिंदु
- लघु-स्तरीय अनुसंधान दवाओं के लिए अनिवार्य परीक्षण लाइसेंस को पूर्व-सूचना तंत्र से बदल दिया गया है।
- यह कदम फार्मास्युटिकल क्षेत्र में 'ease of doing business' में सुधार के लक्ष्य के अनुरूप है।
- उच्च जोखिम वाली साइकोट्रोपिक या मादक दवाओं के लिए वैधानिक प्रसंस्करण समय 90 दिनों से घटाकर 45 दिन कर दिया गया है।
- निर्माताओं को अभी भी प्रक्रियाओं का सावधानीपूर्वक दस्तावेजीकरण करना होगा और Good Manufacturing Practices (GMP) का पालन करना होगा।
- इस संशोधन से दवा विकास की समयसीमा में कम से कम तीन महीने की तेजी आने की उम्मीद है।
परीक्षा तथ्य
- New Drugs and Clinical Trials Rules, 2019 में संशोधन।
- सूचना देने के लिए पोर्टल: SUGAM।
- उच्च जोखिम वाली दवाओं के लिए प्रसंस्करण समय में कमी: 90 से 45 दिन।
पढ़ें। याद रखें। याद करें।
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