भारत और यूरोपीय संघ ने दो दशकों की बातचीत के बाद ऐतिहासिक Free Trade Agreement को अंतिम रूप दिया
भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने लगभग 20 वर्षों की बातचीत के बाद एक ऐतिहासिक Free Trade Agreement (FTA) संपन्न किया है। इस सौदे का लक्ष्य भारत को होने वाले निर्यात को दोगुना करना और 27 देशों के इस ब्लॉक में भारतीय निर्यात के 99.5% पर टैरिफ को समाप्त करना है। लाभान्वित होने वाले प्रमुख क्षेत्रों में कपड़ा, चमड़ा, रत्न और आभूषण शामिल हैं। बदले में, भारत ने EU से होने वाले 97.5% आयात पर टैरिफ रियायतें दी हैं, जिससे यूरोपीय वाइन और लक्जरी कारें काफी सस्ती हो गई हैं। इस समझौते में एक Security and Defence Partnership और भारतीय पेशेवरों और छात्रों की गतिशीलता पर एक ज्ञापन भी शामिल है, जो द्विपक्षीय संबंधों में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है।
मुख्य बिंदु
- FTA भारतीय निर्यात के 99.5% और भारत में EU आयात के 97.5% पर शुल्क समाप्त करता है।
- कपड़ा, चमड़ा और जूते जैसे भारत के प्रमुख श्रम-प्रधान क्षेत्रों को EU बाजार में शून्य-शुल्क पहुंच प्राप्त होगी।
- इस सौदे में समुद्री सुरक्षा और साइबर सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने के लिए एक Security and Defence Partnership शामिल है।
- गतिशीलता पर एक अलग ज्ञापन का उद्देश्य भारतीय पेशेवरों और छात्रों के EU में आवागमन को सुगम बनाना है।
परीक्षा तथ्य
- FTA के लिए बातचीत मूल रूप से 2007 में शुरू हुई थी, 2013 में निलंबित कर दी गई और 2022 में फिर से शुरू की गई।
- इस सौदे का लक्ष्य यूरोपीय वाइन के लिए टैरिफ को 150% से घटाकर 20-30% और कारों के लिए 110% से घटाकर 10% करना है।
- यह समझौता EU के लिए 144 सेवा उप-क्षेत्रों और भारत के लिए 102 सेवा उप-क्षेत्रों को कवर करता है।
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