नए VB-GRAM G Act का विश्लेषण और ग्रामीण रोजगार गारंटी के लिए इसके निहितार्थ
यह लेख नए पेश किए गए Viksit Bharat - Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) Act (VB-GRAM G Act) की आलोचना करता है, जिसका उद्देश्य MGNREGA को बदलना या संशोधित करना है। जबकि सरकार का दावा है कि यह रोजगार गारंटी को बढ़ाकर 125 दिन करता है, आलोचकों का तर्क है कि Section 5(1) केंद्र को विशिष्ट क्षेत्रों में गारंटी को 'बंद' (switch off) करने की अनुमति देता है, जो 'काम के अधिकार' के सिद्धांत को कमजोर करता है। इसके अलावा, 'normative funding' (बजट सीमा) की ओर बदलाव से राज्यों में धन का असमान वितरण हो सकता है, जिससे बिहार और झारखंड जैसे गरीब राज्यों को नुकसान हो सकता है जिन्हें उच्च MGNREGA रोजगार की आवश्यकता है।
मुख्य बिंदु
- VB-GRAM G Act एक विवेकाधीन 'switch-off' प्रावधान पेश करता है जो सरकार को विशिष्ट क्षेत्रों में गारंटी को निलंबित करने की अनुमति देता है।
- Normative funding मांग-आधारित दृष्टिकोण की जगह लेती है, जो उच्च गरीबी स्तर वाले राज्यों के लिए धन को सीमित कर सकती है।
- यह अधिनियम पारदर्शिता के लिए डिजिटल तकनीक पर जोर देता है, हालांकि आलोचक MGNREGA में ऐसी प्रणालियों की पिछली विफलताओं की ओर इशारा करते हैं।
- MGNREGA बजट वर्तमान में भारत के GDP का लगभग 0.25% है।
परीक्षा तथ्य
- VB-GRAM G Act, MGNREGA के 100 दिनों की तुलना में प्रति वर्ष 125 दिनों का काम प्रदान करता है।
- अधिनियम की Section 5(1) में विवादास्पद 'switch-off' प्रावधान है।
- VB-GRAM G Act की Section 20 सोशल ऑडिट से संबंधित है, जो MGNREGA की Section 17 के समान है।
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