भारत के जनसांख्यिकीय बदलाव को संबोधित करना: सार्वजनिक वित्त पोषित Geriatric Care की आवश्यकता

हाल ही में एक RBI रिपोर्ट भारतीय राज्यों में असमान जनसांख्यिकीय संक्रमण पर प्रकाश डालती है। केरल और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों के 2036 तक 'ageing states' बनने का अनुमान है, जहां बुजुर्गों की आबादी 20% से अधिक होगी। इसके विपरीत, बिहार और यूपी जैसे उत्तरी राज्यों में 2031 के बाद कार्यशील आयु की आबादी में वृद्धि देखी जाएगी। यह बदलाव राजकोषीय दबाव पैदा करता है, क्योंकि वृद्ध होते राज्यों को उच्च पेंशन लागत और जनसंख्या-आधारित सूत्रों के कारण कम कर हस्तांतरण (tax devolution) का सामना करना पड़ता है। लेख 'care economy' पर केंद्रित एक नई औद्योगिक नीति और सभी के लिए 'गरिमापूर्ण बुढ़ापा' सुनिश्चित करने हेतु सार्वजनिक geriatric care के व्यापक विस्तार की वकालत करता है।

मुख्य बिंदु

  • केरल और तमिलनाडु की बुजुर्ग आबादी 2036 तक क्रमशः 22% और 20% से अधिक होने की उम्मीद है।
  • Finance Commission का जनसंख्या भार (population weightage) सूत्र उन राज्यों को नुकसान पहुंचाता है जिन्होंने जनसंख्या वृद्धि को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया है।
  • भारत में बुढ़ापा महिलाओं को असमान रूप से प्रभावित करता है, जो अक्सर लंबे समय तक जीवित रहती हैं लेकिन उनके पास कम वित्तीय संपत्ति और कोई औपचारिक पेंशन नहीं होती है।
  • प्रवासन और एकल परिवारों के उदय के कारण पारिवारिक सहायता का अनौपचारिक सुरक्षा जाल टूट रहा है।

परीक्षा तथ्य

  • RBI रिपोर्ट 2036 तक केरल और तमिलनाडु को 'ageing states' के रूप में अनुमानित करती है।
  • बिहार और यूपी में कार्यशील आयु की आबादी 2031 के बाद भी बढ़ती रहेगी।
  • Finance Commission के सूत्रों में जनसंख्या भार के कारण दक्षिणी राज्यों को कम केंद्रीय कर हस्तांतरण का सामना करना पड़ता है।

पढ़ें। याद रखें। याद करें।

स्पेस्ड-रिपीटिशन फ्लैशकार्ड, दैनिक क्विज़ और ऑफ़लाइन एक्सेस पाएं — एंड्रॉइड पर मुफ़्त।

Google Play पर पाएं

के सभी करेंट अफेयर्स 27 जनवरी 2026