BRICS Summit 2026 में हरित और लचीले एजेंडे का नेतृत्व करने का भारत का अवसर

चूंकि भारत 2026 में BRICS Summit की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है, इसलिए ग्लोबल साउथ (Global South) के लिए एक हरित एजेंडे पर ध्यान केंद्रित करने की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय जलवायु संगठनों से हटने की संभावना के साथ, BRICS सहयोगात्मक बहुपक्षवाद (collaborative multilateralism) के लिए एक स्थिर शक्ति प्रदान कर सकता है। लेख सुझाव देता है कि BRICS को केवल 'G-7 या G-20' ढांचे से आगे बढ़ना चाहिए और जलवायु वित्त (climate finance) चर्चाओं में विश्व बैंक और IMF जैसे संस्थानों को शामिल करना चाहिए। वैश्विक जलवायु प्रक्रिया को संचालित करने में भारत का नेतृत्व महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से अनुकूलन (adaptation), लचीलापन और सतत विकास में, साथ ही हरित क्षेत्र में चीनी महत्वाकांक्षाओं का मुकाबला करने में।

मुख्य बिंदु

  • BRICS अब वैश्विक GDP का लगभग 40% और वैश्विक भूभाग का 26% प्रतिनिधित्व करता है।
  • 'BASIC' समूह (ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, भारत, चीन) UNFCCC वार्ताओं में एक प्रमुख खिलाड़ी बना हुआ है।
  • भारत अपनी BRICS अध्यक्षता का उपयोग जलवायु वित्त के संबंध में ग्लोबल साउथ की मांगों को स्पष्ट करने के लिए कर सकता है।
  • जुलाई 2025 में रियो में आयोजित BRICS Summit का एक प्रमुख परिणाम Framework Declaration on Climate Finance था।

परीक्षा तथ्य

  • भारत 2026 में BRICS Summit की मेजबानी करेगा।
  • जुलाई 2025 का BRICS Summit रियो डी जनेरियो में आयोजित किया गया था।
  • BRICS के सदस्यों में अब मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और UAE शामिल हैं।

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