पुन: प्रयोज्य रॉकेट (Reusable Rocket) तकनीक में प्रगति: टिकाऊ और लागत प्रभावी अंतरिक्ष पहुंच
वाणिज्यिक अंतरिक्ष उद्योग पुन: प्रयोज्य रॉकेट प्रौद्योगिकियों द्वारा संचालित एक क्रांति के दौर से गुजर रहा है, जो लॉन्च लागत को काफी कम करते हैं और मिशन की आवृत्ति बढ़ाते हैं। SpaceX जैसी कंपनियों ने पहले चरण के बूस्टर के पुन: उपयोग की व्यवहार्यता का प्रदर्शन किया है, जिसमें कुछ Falcon 9 रॉकेट 30 से अधिक बार उड़ान भर चुके हैं। 'डिस्पोजेबल' से 'परिवहन' मॉडल की ओर इस बदलाव से 2030 तक अंतरिक्ष उद्योग का मूल्य $1 ट्रिलियन तक पहुंचने की उम्मीद है। भारत का ISRO भी अपना स्वयं का Reusable Launch Vehicle (RLV) विकसित कर रहा है और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बने रहने के लिए मिड-एयर कैप्चर और वर्टिकल लैंडिंग जैसे रिकवरी तरीकों की खोज कर रहा है।
मुख्य बिंदु
- पुन: प्रयोज्यता (Reusability) व्यय योग्य रॉकेटों की तुलना में अंतरिक्ष तक पहुंच की लागत को 5-20 गुना कम कर देती है।
- SpaceX का 'वर्टिकल इंटीग्रेशन' और 3D प्रिंटिंग का उपयोग लागत कम करने में उसकी सफलता की कुंजी रहा है।
- ISRO का RLV-LEX (Landing Experiment) भारत के अपने पुन: प्रयोज्य अंतरिक्ष शटल की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- भविष्य के लॉन्च वाहन प्रदर्शन और लागत को संतुलित करने के लिए आंशिक या पूर्ण रिकवरी के साथ दो-चरणीय डिजाइनों पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
- वाणिज्यिक अंतरिक्ष बाजार का मूल्य 2030 तक $1 ट्रिलियन से अधिक होने का अनुमान है।
परीक्षा तथ्य
- वैश्विक अंतरिक्ष उद्योग का मूल्य 2030 तक $1 ट्रिलियन से अधिक होने का अनुमान है।
- SpaceX के Falcon 9 के पहले चरण को कुछ मिशनों के लिए 30 से अधिक बार पुन: उपयोग किया गया है।
- ISRO Reusable Launch Vehicle (RLV) पर काम कर रहा है, जो एक मिनी शटल की तरह पंखों वाला अंतरिक्ष यान है।
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