भारत के दक्षिणी राज्यों के लिए परिसीमन (Delimitation) और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की चुनौतियों का समाधान
2028 की जनगणना के बाद अपेक्षित आगामी परिसीमन (delimitation) अभ्यास भारत के संघीय संतुलन के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती पेश करता है। दक्षिणी राज्य, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण और स्वास्थ्य सुधारों को सफलतापूर्वक लागू किया है, उच्च जनसंख्या वृद्धि वाले उत्तरी राज्यों की तुलना में अपनी Lok Sabha सीट हिस्सेदारी में कमी की आशंका जता रहे हैं। 84th Constitutional Amendment (2001) ने 2026 तक सीटों की संख्या को फ्रीज कर दिया था। प्रस्तावित समाधानों में Lok Sabha सीटों की कुल संख्या को लगभग 866 तक बढ़ाना या 'Digressive Proportionality' सिद्धांत को अपनाना शामिल है, जो European Parliament के समान है, ताकि जनसांख्यिकीय प्रगति के लिए राज्यों को दंडित किए बिना उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जा सके।
मुख्य बिंदु
- कड़ाई से जनसंख्या पर आधारित परिसीमन दक्षिणी राज्यों की सापेक्ष राजनीतिक और राजकोषीय शक्ति को कम कर सकता है।
- 84th Constitutional Amendment Act (2001) ने 2026 के बाद पहली जनगणना तक Lok Sabha सीटों पर रोक बढ़ा दी थी।
- Finance Commission वर्तमान में कर राजस्व पुनर्वितरण के लिए जनसंख्या के आकार को 15% भार के रूप में उपयोग करता है।
- जनसंख्या आनुपातिकता और राज्य समानता के बीच संतुलन बनाने के लिए एक समझौते के रूप में 'Digressive Proportionality' का सुझाव दिया गया है।
परीक्षा तथ्य
- 84th Constitutional Amendment Act (2001) ने 2026 तक Lok Sabha में सीटों की संख्या को फ्रीज कर दिया था।
- अगली जनगणना के परिणाम अक्टूबर 2028 तक आने की उम्मीद है।
- मौजूदा सीटों को खोए बिना 2011 की जनगणना के आधार पर पुनर्वितरण के परिणामस्वरूप लगभग 866 सदस्यों की Lok Sabha होगी।
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