POCSO Act के दुरुपयोग को रोकने के लिए सहमति की आयु (Age of Consent) कम करने पर कानूनी बहस तेज हुई

भारत में सहमति की आयु (age of consent) के संबंध में कानूनी और सामाजिक बहस बढ़ रही है, जो वर्तमान में POCSO Act (2012) के तहत 18 वर्ष निर्धारित है। आलोचकों का तर्क है कि कठोर आयु सीमा किशोरों के बीच आपसी सहमति वाले संबंधों को अपराध की श्रेणी में डालती है, जिसे अक्सर परिवारों द्वारा युवा जोड़ों को दंडित करने के लिए हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। जबकि Law Commission (2023) ने आयु को 16 तक कम करने के खिलाफ सलाह दी थी, इसने 16-18 वर्ष की आयु के नाबालिगों से जुड़े मामलों में सजा के लिए 'निर्देशित न्यायिक विवेक' (guided judicial discretion) की सिफारिश की। हाल के High Court और Supreme Court के फैसलों ने किशोर स्वायत्तता की रक्षा के लिए शोषणकारी दुर्व्यवहार और 'युवा प्रेम' के बीच अंतर करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है।

मुख्य बिंदु

  • POCSO Act सख्त दायित्व (strict liability) लागू करता है, जिससे 18 वर्ष से कम आयु के नाबालिग की सहमति कानूनी रूप से अप्रासंगिक हो जाती है।
  • Criminal Law (Amendment) Act, 2013 ने POCSO के साथ संरेखित करने के लिए सहमति की आयु 16 से बढ़ाकर 18 कर दी थी।
  • Law Commission की 283वीं रिपोर्ट (2023) ने आयु कम करने का विरोध किया लेकिन सजा में न्यायिक विवेक का सुझाव दिया।
  • कानून का दुरुपयोग अक्सर घर से भागने या जाति और धार्मिक सीमाओं को पार करने वाले संबंधों के मामलों में होता है।

परीक्षा तथ्य

  • Criminal Law (Amendment) Act, 2013 द्वारा सहमति की आयु 16 से बढ़ाकर 18 कर दी गई थी।
  • Law Commission of India की 283वीं रिपोर्ट (2023) POCSO Act के तहत सहमति की आयु से संबंधित है।
  • Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) की Section 63 बलात्कार को परिभाषित करती है और इसमें सहमति के बिना किए गए कार्य शामिल हैं यदि महिला 18 वर्ष से कम आयु की है।

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