सरकार ने MSMEs के लिए Export Promotion Mission के तहत नई क्रेडिट-लिंक्ड योजनाओं का अनावरण किया

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने MSME निर्यातकों का समर्थन करने के लिए Export Promotion Mission (EPM) के तहत दो नई क्रेडिट-लिंक्ड योजनाएं शुरू की हैं। 'Interest Subvention for Pre- and Post-Shipment Export Credit' का उद्देश्य वित्तपोषण लागत को कम करना और तरलता (liquidity) में सुधार करना है। दूसरी योजना, 'Collateral Support for Export Credit', MSMEs को सीमित संपार्श्विक (collateral) के साथ भी बैंक ऋण तक पहुंच प्रदान करती है, जो सूक्ष्म और लघु निर्यातकों के लिए 85% तक की गारंटी प्रदान करती है। Niryat Protsahan श्रेणी का हिस्सा इन पहलों में भारतीय MSMEs को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (global value chains) में एकीकृत करने के लिए छह वर्षों में 5,181 करोड़ रुपये का परिव्यय शामिल है।

मुख्य बिंदु

  • Export Promotion Mission (EPM) का उद्देश्य ऋण की लागत को कम करना और भारतीय निर्यातकों के लिए वित्त तक पहुंच को आसान बनाना है।
  • ब्याज सहायता (Interest subvention) योजनाएं MSME तरलता को मजबूत करने और उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए डिज़ाइन की गई हैं।
  • CGTMSE के माध्यम से कार्यान्वित Collateral Support योजना, निर्यात से जुड़े ऋणों के लिए सुरक्षा प्रदान करने के बोझ को कम करती है।
  • ये योजनाएं Export Promotion Mission के तहत 11 विभिन्न कार्यक्रमों को संचालित करने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं।

परीक्षा तथ्य

  • इन दोनों योजनाओं का 2030-31 तक कुल परिव्यय 5,181 करोड़ रुपये है।
  • सूक्ष्म और लघु निर्यातक 85% तक की गारंटी के लिए पात्र हैं, जबकि मध्यम निर्यातकों के लिए यह सीमा 65% है।
  • ये योजनाएं Credit Guarantee Fund Trust for Micro and Small Enterprises (CGTMSE) के माध्यम से कार्यान्वित की जाती हैं।

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