Circular Economy और एकीकृत अपशिष्ट प्रबंधन रणनीतियों के माध्यम से शहरी भारत का परिवर्तन
2050 तक भारत की शहरी आबादी 814 मिलियन तक पहुँचने के अनुमान के साथ, अपशिष्ट प्रबंधन एक महत्वपूर्ण चुनौती है। यह लेख 'Reduce, Reuse, Recycle' पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक रैखिक (linear) से Circular Economy की ओर बढ़ने पर जोर देता है। मुख्य मुद्दों में प्लास्टिक कचरा, Construction and Demolition (C&D) कचरा और अपशिष्ट जल (wastewater) शामिल हैं। जबकि SBM 2.0 का लक्ष्य 'Garbage Free Cities' है, खराब पृथक्करण (segregation) और अंतर-विभागीय समन्वय की कमी जैसी बाधाएं बनी हुई हैं। आगामी Environment (Construction and Demolition) Waste Management Rules 2025 और Extended Producer Responsibility (EPR) का विस्तार स्थिरता प्राप्त करने और जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
मुख्य बिंदु
- बढ़ते शहरी कचरे के प्रबंधन के लिए भारत को रैखिक 'take-make-dispose' मॉडल से Circular Economy में संक्रमण करने की आवश्यकता है।
- स्रोत पर खराब पृथक्करण और गैर-पुनर्चक्रण योग्य (non-recyclable) सामग्रियों की उपस्थिति के कारण प्लास्टिक कचरा सबसे कठिन चुनौती बना हुआ है।
- अवैध डंपिंग को रोकने के लिए Construction and Demolition कचरे की बेहतर ट्रैकिंग और प्रबंधन नियमों के प्रवर्तन की आवश्यकता है।
- शहरी केंद्रों में बढ़ते जल सुरक्षा संकट को दूर करने के लिए कृषि और उद्योग के लिए अपशिष्ट जल का पुनर्चक्रण (recycling) आवश्यक है।
परीक्षा तथ्य
- 2050 तक भारत की शहरी आबादी बढ़कर 814 मिलियन होने की उम्मीद है।
- Environment (Construction and Demolition) Waste Management Rules, 2025, 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होंगे।
- SBM 2.0 के तहत 'Garbage Free Cities' (GFC) का लक्ष्य 2026 के लिए निर्धारित है।
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