भारत की अंतरिक्ष यात्रा: Chandrayaan-3 की सफलता से Gaganyaan और Bharatiya Antariksh Station जैसे भविष्य के मिशनों तक
भारत का अंतरिक्ष क्षेत्र सरकारी नेतृत्व वाली पहल से बदलकर एक वैश्विक शक्ति बन गया है। मुख्य उपलब्धियों में Chandrayaan-3 की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर लैंडिंग और Aditya-L1 मिशन शामिल हैं। भविष्य के लक्ष्यों में Gaganyaan मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन (2027 के लिए लक्षित), 2035 तक एक समर्पित अंतरिक्ष स्टेशन और 2040 तक मानवयुक्त चंद्र लैंडिंग शामिल है। यह क्षेत्र निजी खिलाड़ियों के लिए खुल रहा है, जिसमें 350 से अधिक स्टार्टअप और काफी बढ़ा हुआ बजट है। NASA के साथ NISAR मिशन और JAXA के साथ LUPEX जैसे अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, अंतरिक्ष अन्वेषण और जलवायु निगरानी में वैश्विक भागीदार के रूप में भारत की भूमिका को रेखांकित करते हैं।
मुख्य बिंदु
- भारत Chandrayaan-3 मिशन के साथ चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला पहला देश बना।
- Gaganyaan मिशन का लक्ष्य भारत की पहली स्वदेशी मानव अंतरिक्ष उड़ान हासिल करना है, जो वर्तमान में 2027 के लिए लक्षित है।
- अंतरिक्ष बजट 2013-14 में ₹5,615 करोड़ से लगभग तीन गुना बढ़कर 2025-26 में ₹13,416 करोड़ हो गया है।
- भारत की योजना 2035 तक 'Bharatiya Antariksh Station' स्थापित करने और 2040 तक चंद्रमा पर मानव उतारने की है।
- निजी क्षेत्र के इकोसिस्टम में अब 350 से अधिक स्टार्टअप शामिल हैं जो सैटेलाइट, लॉन्च व्हीकल और ग्राउंड सिस्टम बना रहे हैं।
परीक्षा तथ्य
- Chandrayaan-3 की लैंडिंग के उपलक्ष्य में 23 अगस्त को National Space Day मनाया जाता है।
- NISAR मिशन NASA (USA) और ISRO (भारत) के बीच एक सहयोगी परियोजना है।
- LUPEX (Lunar Polar Exploration) ISRO और JAXA (जापान) के बीच एक संयुक्त मिशन है।
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