हिमाचल प्रदेश सरकार औषधीय उपयोग के लिए भांग (Cannabis) की खेती को वैध और विनियमित करने की ओर अग्रसर
हिमाचल प्रदेश सरकार भांग (cannabis) की खेती को वैध और विनियमित करने के लिए एक नीति को अंतिम रूप दे रही है, जिसका लक्ष्य ₹1,000 करोड़ से ₹2,000 करोड़ का वार्षिक राजस्व उत्पन्न करना है। नीति फसल के औषधीय मूल्य, विशेष रूप से दर्द प्रबंधन और सूजन-रोधी अनुप्रयोगों के साथ-साथ औद्योगिक उपयोग (hemp) पर केंद्रित है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि इस रणनीतिक बदलाव का उद्देश्य भांग की नशीली छवि को एक उत्पादक पहचान के साथ बदलना है। ढांचे में अवैध व्यापार को रोकने के लिए सख्त नियम और कानून शामिल होंगे जबकि राज्य के लिए एक नए आर्थिक मार्ग को बढ़ावा दिया जाएगा।
मुख्य बिंदु
- हिमाचल प्रदेश का लक्ष्य वैध और विनियमित भांग की खेती के माध्यम से सालाना ₹2,000 करोड़ तक राजस्व उत्पन्न करना है।
- नीति दर्द प्रबंधन जैसे औषधीय अनुप्रयोगों और हेंप (hemp) फाइबर के औद्योगिक उपयोग पर केंद्रित है।
- इस कदम का उद्देश्य भांग को अवैध मादक पदार्थों के व्यापार के जुड़ाव से बदलकर एक विनियमित औषधीय फसल बनाना है।
- राज्य कैबिनेट द्वारा अगले दो महीनों के भीतर अंतिम नीति ढांचे को मंजूरी दिए जाने की उम्मीद है।
परीक्षा तथ्य
- वैध भांग से अनुमानित वार्षिक राजस्व ₹1,000 करोड़ और ₹2,000 करोड़ के बीच है।
- यह नीति विशेष रूप से कुल्लू, मंडी और चंबा की घाटियों को लक्षित करती है जहाँ भांग जंगली रूप में उगती है।
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