आदिवासी समुदायों को सशक्त बनाने के लिए Ol Chiki लिपि का उपयोग करके संथाली भाषा में भारत का संविधान जारी किया गया
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने हाल ही में राष्ट्रपति भवन में भारत के संविधान का संथाली अनुवाद जारी किया। अनुवाद में Ol Chiki लिपि का उपयोग किया गया है, जो संथाली भाषा की पारंपरिक लिपि है। इस पहल का उद्देश्य मुख्य रूप से झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार में स्थित संथाली भाषी आदिवासी आबादी को उनके मौलिक अधिकारों और देश के कानूनी ढांचे को बेहतर ढंग से समझने में सक्षम बनाना है। इस कदम को भाषाई समावेश और आदिवासी विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि देश का बुनियादी दस्तावेज सभी नागरिकों को उनकी मातृभाषा में उपलब्ध हो।
मुख्य बिंदु
- संविधान का संथाली संस्करण Ol Chiki लिपि में लिखा गया है।
- संथाली झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार राज्यों में बोली जाने वाली एक प्रमुख आदिवासी भाषा है।
- यह पहल आदिवासी समुदायों के बीच भाषाई विविधता और संवैधानिक जागरूकता को बढ़ावा देती है।
- रिलीज समारोह में उपराष्ट्रपति और केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री शामिल हुए।
परीक्षा तथ्य
- संथाली भारतीय संविधान की Eighth Schedule में शामिल भाषाओं में से एक है।
- Ol Chiki लिपि का निर्माण पंडित रघुनाथ मुर्मू (Pandit Raghunath Murmu) द्वारा किया गया था।
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