नीति आयोग (NITI Aayog) ने भारतीय उच्च शिक्षा के वैश्वीकरण के लिए $10-बिलियन के अनुसंधान कोष और छात्रवृत्ति का प्रस्ताव दिया
नीति आयोग ने 'भारत में उच्च शिक्षा का अंतर्राष्ट्रीयकरण' (Internationalisation of Higher Education in India) शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें विदेशी छात्रों और संकायों को आकर्षित करने के लिए एक रोडमैप का प्रस्ताव दिया गया है। प्रमुख सिफारिशों में $10-बिलियन का 'भारत विद्या कोष' (राष्ट्रीय अनुसंधान संप्रभु धन कोष) स्थापित करना, 'विश्व बंधु' छात्रवृत्ति शुरू करना और भारत में अंतर्राष्ट्रीय परिसरों के लिए नियमों को आसान बनाना शामिल है। रिपोर्ट का उद्देश्य उस 'असंतुलन' को दूर करना है जहां भारत आने वाले प्रत्येक एक अंतरराष्ट्रीय छात्र के बदले 28 भारतीय छात्र विदेश जाते हैं। यह NIRF रैंकिंग को अपडेट करने और National Education Policy (NEP) 2020 के साथ संरेखित करने का भी सुझाव देता है।
मुख्य बिंदु
- अनुसंधान के लिए $10-बिलियन के भारत विद्या कोष का प्रस्ताव है, जिसमें 50% धन प्रवासी भारतीयों (diaspora) से मिलने की उम्मीद है।
- 'विश्व बंधु' योजना का उद्देश्य समर्पित छात्रवृत्ति और फेलोशिप के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं को आकर्षित करना है।
- भारत का लक्ष्य वैश्विक शिक्षा केंद्र बनने के लिए 2047 तक लगभग 7.89 लाख अंतरराष्ट्रीय छात्रों की मेजबानी करना है।
- रिपोर्ट छात्र गतिशीलता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की सुविधा के लिए Erasmus+ जैसे कार्यक्रम का सुझाव देती है।
परीक्षा तथ्य
- $10 बिलियन भारत विद्या कोष (प्रस्तावित अनुसंधान कोष)।
- 2024 में बाहर जाने वाले और भारत आने वाले छात्रों का अनुपात 28:1।
- 2047 तक 7.89 लाख अंतरराष्ट्रीय छात्रों का लक्ष्य।
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