पश्चिम बंगाल में OBC सूचियों की जांच National Commission for Backward Classes की संवैधानिक भूमिका पर प्रकाश डालती है

National Commission for Backward Classes (NCBC) ने पश्चिम बंगाल की केंद्रीय OBC सूची से 35 मुस्लिम समुदायों को बाहर करने की सिफारिश की है, जिससे आरक्षण के मानदंडों पर बहस छिड़ गई है। NCBC का तर्क है कि ये समावेशन अक्सर मात्रात्मक सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन के बजाय धर्म पर आधारित थे। यह मुद्दा 102nd Constitutional Amendment Act के महत्व को रेखारेखांकित करता है, जिसने NCBC को संवैधानिक दर्जा दिया था। इस जांच में Sachar और Ranganath Misra जैसी पिछली समितियों की रिपोर्टों की जांच शामिल है ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि समुदाय सकारात्मक कार्रवाई (affirmative action) के कठोर मानकों को पूरा करते हैं या नहीं।

मुख्य बिंदु

  • NCBC OBC सूची में समुदायों को शामिल करने की समीक्षा कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे सामाजिक और शैक्षिक पिछड़ेपन के मानदंडों को पूरा करते हैं।
  • 102nd Constitutional Amendment Act (2018) ने NCBC को संवैधानिक दर्जा दिया और पिछड़े वर्गों को अधिसूचित करने में संसद की भूमिका को परिभाषित किया।
  • Supreme Court ने आरक्षण सूचियों में समुदायों को शामिल करने को उचित ठहराने के लिए मात्रात्मक डेटा (quantifiable data) की आवश्यकता पर जोर दिया है।
  • बहस इस बात पर है कि क्या पिछले राज्य-स्तरीय वर्गीकरणों में पिछड़ेपन के प्रतिनिधि (proxy) के रूप में धार्मिक पहचान का उपयोग किया गया था।

परीक्षा तथ्य

  • 102nd Constitutional Amendment Act (2018)
  • Article 338B: NCBC का संवैधानिक दर्जा
  • Sachar Committee Report (2006)
  • Ranganath Misra Committee Report (2007)

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