CAA 2019 के तहत नागरिकता केवल दावों के आधिकारिक सत्यापन के बाद ही दी जाएगी, Supreme Court ने कहा

Supreme Court ने स्पष्ट किया कि Citizenship (Amendment) Act (CAA), 2019, Afghanistan, Bangladesh और Pakistan के उत्पीड़ित धार्मिक अल्पसंख्यकों को प्रवर्तनीय अधिकार प्रदान करता है, लेकिन ये अधिकार आधिकारिक सत्यापन (official verification) पर निर्भर हैं। एक NGO, Aatmadeep ने West Bengal में मतदाता सूची के 'Special Intensive Revision' (SIR) के बारे में चिंता जताई, जिससे नागरिकता प्रमाण पत्र जारी करने में देरी के कारण शरणार्थियों के राज्यविहीन (stateless) होने का खतरा है। Court ने जोर दिया कि हालांकि कानून मौजूद है, कार्यान्वयन के लिए एक तंत्र का पालन किया जाना चाहिए। इसने इन आवेदकों की स्थिति और उनकी पावती रसीदों (acknowledgment receipts) की वैधता के संबंध में Centre और Election Commission से जवाब मांगा है।

मुख्य बिंदु

  • CAA 2019 तीन पड़ोसी देशों के हिंदुओं, सिखों, बौद्धों, जैनियों, पारसियों और ईसाइयों को नागरिकता अधिकार प्रदान करता है।
  • Supreme Court ने कहा कि नागरिकता प्रदान करने से पहले अधिकारियों द्वारा प्रत्येक दावे की जांच और सत्यापन किया जाना चाहिए।
  • मतदाता सूची के चल रहे Special Intensive Revision (SIR) ने उन लोगों के बीच राज्यविहीनता का डर पैदा कर दिया है जिनके दावे लंबित हैं।
  • NGO ने तर्क दिया कि मताधिकार से वंचित होने से रोकने के लिए प्राकृतिककरण (naturalization) आवेदनों की पावती रसीदों को नागरिकता के अनंतिम प्रमाण के रूप में माना जाना चाहिए।

परीक्षा तथ्य

  • CAA की Section 2(1)(b) का परंतुक (Proviso) विशिष्ट धार्मिक अल्पसंख्यकों को 'अवैध प्रवासी' (illegal migrants) माने जाने से छूट देता है।
  • CAA की Section 6B पात्र व्यक्तियों को पंजीकरण या प्राकृतिककरण प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करने की अनुमति देती है।
  • CAA के तहत भारत में प्रवेश की कट-ऑफ तारीख 31 दिसंबर, 2014 या उससे पहले है।

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