भारत की पर्यावरण नीति और Aravalli Range के क्षरण का आलोचनात्मक विश्लेषण

यह विश्लेषण भारत में गंभीर पर्यावरणीय क्षरण पर प्रकाश डालता है, विशेष रूप से Aravalli range और बढ़ते प्रदूषण स्तरों पर ध्यान केंद्रित करता है। यह पारिस्थितिक स्वास्थ्य की कीमत पर औद्योगिक परियोजनाओं के लिए मंजूरी को आसान बनाने के लिए Forest (Conservation) Amendment Act 2023 और Draft EIA Notification 2020 जैसे हालिया विधायी परिवर्तनों की आलोचना करता है। लेख में दिल्ली के भूजल में यूरेनियम संदूषण के उच्च स्तर और National Green Tribunal (NGT) के कमजोर होने का उल्लेख किया गया है। यह सहकारी संघवाद (cooperative federalism) के माध्यम से केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और प्रदूषण के प्रति 'whole-of-government' दृष्टिकोण को शामिल करते हुए 'पर्यावरण के लिए एक नए सौदे' (new deal for the environment) का आह्वान करता है।

मुख्य बिंदु

  • शिथिल सरकारी नियमों और ऊंचाई सीमा छूट के कारण Aravalli range मरुस्थलीकरण और अवैध खनन का सामना कर रही है।
  • Forest (Conservation) Act और Coastal Regulation Zone (CRZ) नियमों में हालिया संशोधनों को पर्यावरण संरक्षण को कमजोर करने के रूप में देखा जा रहा है।
  • दिल्ली और पंजाब में भूजल में यूरेनियम संदूषण का स्तर मानव उपभोग के लिए अनुमेय सीमा से काफी ऊपर है।
  • रिक्तियों और सरकारी दबाव से कम हुई स्वतंत्रता के कारण National Green Tribunal (NGT) कमजोर हो गया है।

परीक्षा तथ्य

  • Forest (Conservation) Amendment Act, 2023 ने भूमि की बड़ी श्रेणियों को वन मंजूरी नियमों से छूट दी है।
  • Central Ground Water Board (CGWB) ने बताया कि दिल्ली में परीक्षण किए गए 13-15% नमूनों में सीमा से अधिक यूरेनियम है।
  • National Clean Air Programme (NCAP) भारत में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए प्राथमिक पहल है।

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