सुप्रीम कोर्ट Generative AI से नकली केस कानूनों के जोखिमों से संबंधित याचिका पर सुनवाई करेगा

सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक कार्य में Generative Artificial Intelligence (GenAI) के अंधाधुंध उपयोग के खिलाफ चेतावनी देने वाली एक याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति व्यक्त की है। याचिका में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि GenAI 'hallucinations' उत्पन्न कर सकता है, जिसके परिणामस्वरूप काल्पनिक निर्णय और शोध सामग्री बन सकती है। इसमें तर्क दिया गया है कि अपारदर्शी AI उपयोग संवैधानिक और मानवाधिकार संबंधी चिंताओं को जन्म दे सकता है, संभावित रूप से मौजूदा पूर्वाग्रहों और भेदभावपूर्ण प्रथाओं को दोहरा सकता है या बढ़ा सकता है। याचिकाकर्ता तब तक अदालतों और न्यायाधिकरणों में GenAI के विनियमित और पारदर्शी उपयोग के लिए सख्त दिशानिर्देश या नीति चाहता है जब तक कि हितधारक दायित्व सुनिश्चित करने के लिए एक औपचारिक कानून नहीं बनाया जाता।

मुख्य बिंदु

  • GenAI 'hallucinations' अदालत की कार्यवाही में गैर-मौजूद मिसालों और नकली केस कानूनों के उद्धरण का कारण बन सकते हैं।
  • याचिका न्यायपालिका से मानवाधिकारों की रक्षा के लिए केवल पूर्वाग्रह-मुक्त डेटा का उपयोग करने का आग्रह करती है, जिसमें पारदर्शी स्वामित्व हो।
  • AI एल्गोरिदम द्वारा पहले से मौजूद सामाजिक, कानूनी और रूढ़िवादी पूर्वाग्रहों को दोहराने और बढ़ाने का जोखिम है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक कार्यप्रणाली में AI के अतिक्रमणों को विनियमित करने के लिए एक सख्त नीति की आवश्यकता को स्वीकार किया है।

परीक्षा तथ्य

  • मुख्य न्यायाधीश B.R. Gavai की अध्यक्षता वाली पीठ।
  • 'AI Hallucinations' की अवधारणा AI द्वारा प्रशंसनीय लेकिन झूठी जानकारी उत्पन्न करने को संदर्भित करती है।
  • अधिवक्ता Kartikeya Rawal द्वारा दायर याचिका।

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