सुप्रीम कोर्ट ने 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' पर सुनवाई करते हुए महिलाओं को 'सबसे बड़ा अल्पसंख्यक' बताया

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि भारत में महिलाएं 'सबसे बड़ा अल्पसंख्यक' हैं, जो कुल आबादी का 48.44% हैं, फिर भी संसद में उनका प्रतिनिधित्व कम हो रहा है। जस्टिस B.V. Nagarathna की अध्यक्षता वाली एक पीठ 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (106th Amendment Act) के कार्यान्वयन में देरी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह अधिनियम, जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण प्रदान करता है, अगली जनगणना और उसके बाद के परिसीमन से जुड़ा है। कोर्ट ने जनगणना के लिए एक विशिष्ट समय-सीमा की कमी पर सवाल उठाया, यह देखते हुए कि एक संवैधानिक संशोधन को अनिश्चित काल तक रोका नहीं जा सकता।

मुख्य बिंदु

  • महिलाएं कुल आबादी का 48.44% हैं लेकिन संसद और राज्य विधानसभाओं में पर्याप्त राजनीतिक प्रतिनिधित्व का अभाव है।
  • 106th Amendment Act 33% आरक्षण प्रदान करता है, लेकिन इसका कार्यान्वयन अगली जनगणना और परिसीमन अभ्यास से जुड़ा है।
  • संविधान का Article 15(3) राज्य को सकारात्मक कार्रवाई करने और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए विशेष प्रावधान बनाने का आदेश देता है।
  • याचिका में तर्क दिया गया है कि अनिश्चित काल के लिए कार्यान्वयन में देरी महिलाओं को राजनीतिक न्याय प्रदान करने के लक्ष्य को कमजोर करती है।

परीक्षा तथ्य

  • 106th Constitutional Amendment Act (Nari Shakti Vandan Adhiniyam)।
  • भारतीय संविधान का Article 15(3)।
  • जस्टिस B.V. Nagarathna याचिका की सुनवाई कर रही दो-न्यायाधीशों की पीठ में एकमात्र महिला न्यायाधीश हैं।

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