CITES पैनल ने Due Diligence प्रथाओं की समीक्षा होने तक भारत को लुप्तप्राय जानवरों के आयात को रोकने की सिफारिश की
Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora (CITES) की एक समिति ने सिफारिश की है कि भारत लुप्तप्राय जानवरों के आयात के लिए परमिट जारी करना बंद कर दे। यह सिफारिश जामनगर में Greens Zoological Rescue and Rehabilitation Centre (Vantara) के दौरे के बाद आई है। हालांकि पैनल को वाणिज्यिक व्यापार का कोई सबूत नहीं मिला, लेकिन उसने कुछ नमूनों की उत्पत्ति और भारतीय अधिकारियों द्वारा due diligence (उचित सावधानी) के प्रयोग पर सवाल उठाए। CITES का सुझाव है कि यह रोक तब तक बनी रहे जब तक कि भारत अपनी प्रथाओं की व्यापक समीक्षा नहीं कर लेता ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि जानवरों का व्यापार अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के उल्लंघन में नहीं किया जा रहा है।
मुख्य बिंदु
- CITES संरक्षित पशु प्रजातियों के सीमा पार आवागमन को विनियमित करने वाला प्राथमिक अंतरराष्ट्रीय समझौता है।
- यह सिफारिश विशेष रूप से Vantara और Radha Krishna Temple Elephant Welfare Trust जैसे चिड़ियाघरों और वन्यजीव बचाव केंद्रों द्वारा किए जाने वाले आयात को लक्षित करती है।
- पैनल ने कई आयातों के लिए उपयोग किए गए स्रोत और लेनदेन के उद्देश्य (purpose-of-transaction) कोड पर चिंता व्यक्त की।
- भारत से आग्रह किया गया है कि ऐसे आयात फिर से शुरू करने से पहले व्यवस्थित रूप से due diligence सुनिश्चित की जाए।
परीक्षा तथ्य
- CITES का पूर्ण रूप Convention on International Trade in Endangered Species of Wild Fauna and Flora है।
- दौरा किया गया केंद्र गुजरात के जामनगर में स्थित Greens Zoological Rescue and Rehabilitation Centre (GZRRC) है।
- CITES रिपोर्ट 31 अक्टूबर को उनकी वेबसाइट पर अपलोड की गई थी।
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