आंध्र प्रदेश में चक्रवात Montha का कहर; समुद्र के बढ़ते तापमान को बढ़ती आवृत्ति से जोड़ा गया
चक्रवात Montha ने हाल ही में आंध्र प्रदेश के काकीनाडा (Kakinada) के पास लैंडफॉल किया, जिससे भारी बारिश हुई और फसलों तथा बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुँचा। विशेषज्ञ बंगाल की खाड़ी में ऐसे तूफानों की बढ़ती आवृत्ति और तीव्रता का कारण बढ़ते Sea Surface Temperatures (SST) को बताते हैं, जो लगातार 28°C से 30°C की सीमा को पार कर रहे हैं। हालांकि आपदा प्रबंधन और निकासी प्रोटोकॉल में सुधार हुआ है, जिससे जनहानि कम हुई है, लेकिन कृषि और पशुधन पर आर्थिक प्रभाव एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। चक्रवाती संरचनाओं के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाने में Indian Ocean Dipole (IOD) और La Niña जैसी जलवायु घटनाओं की भूमिका को भी एक योगदान कारक के रूप में रेखांकित किया गया है।
मुख्य बिंदु
- पिछले 50 वर्षों में बंगाल की खाड़ी में Sea Surface Temperatures में 0.5°C से 1°C की वृद्धि हुई है, जिससे उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के लिए आदर्श स्थिति बन गई है।
- केंद्र और राज्य सरकारों की बेहतर तैयारी ने 1977 और 1999 के ऐतिहासिक सुपर साइक्लोन की तुलना में मृत्यु दर को काफी कम कर दिया है।
- वनों की कटाई और मैंग्रोव जैसे तटीय पारिस्थितिक तंत्र के क्षरण ने प्राकृतिक बफ़र्स को कम कर दिया है, जिससे स्टॉर्म सर्ज (storm surges) से होने वाले नुकसान में वृद्धि हुई है।
- कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान हुआ है, जिसमें 43,000 हेक्टेयर से अधिक की फसलें जलमग्न हो गई हैं और पशुधन तथा पोल्ट्री में महत्वपूर्ण हानि हुई है।
परीक्षा तथ्य
- चक्रवात Montha का लैंडफॉल मंगलवार शाम करीब 7 बजे आंध्र प्रदेश के काकीनाडा (Kakinada) के पास हुआ।
- उष्णकटिबंधीय चक्रवात बनने के लिए SST की सीमा आमतौर पर 28°C से 30°C होती है।
- IITM Pune के अध्ययन पिछले पांच दशकों में बंगाल की खाड़ी के SST में निरंतर वृद्धि का संकेत देते हैं।
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