EU के Carbon Border Adjustment Mechanism (CBAM) के साथ भारतीय कार्बन बाजार का एकीकरण

European Union और भारत, Indian Carbon Market (ICM) को EU के Carbon Border Adjustment Mechanism (CBAM) के साथ जोड़ने के लिए एक रणनीतिक एजेंडे की खोज कर रहे हैं। इस जुड़ाव का उद्देश्य भारतीय निर्यातकों को दोहरी मार से बचाना है—एक बार घरेलू कार्बन कीमतों द्वारा और फिर EU सीमा शुल्क द्वारा। हालांकि, ICM की अविकसित प्रकृति सहित महत्वपूर्ण बाधाएं बनी हुई हैं, जिसमें पूर्ण उत्सर्जन सीमा (absolute emission caps) और मजबूत स्वतंत्र सत्यापन की कमी है। EU की उच्च कार्बन कीमतों (€60-€80) और भारत की कम कीमतों (€5-€10) के बीच के अंतर को पाटना एक बड़ी तकनीकी और राजनीतिक चुनौती है।

मुख्य बिंदु

  • EU का CBAM कार्बन-गहन आयात पर एक सीमा कर (border tax) के रूप में कार्य करता है ताकि EU उद्योगों के लिए समान अवसर सुनिश्चित किए जा सकें।
  • Indian Carbon Market (ICM) वर्तमान में पूर्ण उत्सर्जन सीमा के बजाय तीव्रता सुधार (intensity improvements) पर आधारित है।
  • एक सफल जुड़ाव के लिए ICM को EU के Emissions Trading System (ETS) की अनुपालन-ग्रेड विशेषताओं के अनुरूप होना आवश्यक होगा।
  • एकीकरण के बिना, भारतीय निर्यातकों को घरेलू अनुपालन लागत और पूर्ण CBAM लेवी दोनों का भुगतान करने के जोखिम का सामना करना पड़ेगा।

परीक्षा तथ्य

  • EU कार्बन कीमतें: €60 से €80 प्रति टन; भारतीय कार्बन कीमतें: €5 से €10 प्रति टन।
  • नया Strategic EU-India Agenda 17 सितंबर, 2025 को निर्धारित किया गया था।
  • ICM: Indian Carbon Market; CBAM: Carbon Border Adjustment Mechanism।

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