चंडीगढ़ पुलिस ने हरियाणा के IPS अधिकारी की मौत की जांच में SC/ST Act के कड़े प्रावधान लागू किए
मृतक हरियाणा IPS अधिकारी वाई. पूरन कुमार (Y. Puran Kumar) के परिवार की मांगों और विरोध प्रदर्शनों के बाद, चंडीगढ़ पुलिस ने FIR में SC/ST (Prevention of Atrocities) Act की धारा 3(2)(v) को जोड़ा है। यह धारा SC/ST व्यक्ति के खिलाफ किए गए 10 वर्ष या उससे अधिक की सजा वाले अपराधों के लिए आजीवन कारावास का प्रावधान करती है। अधिकारी के 'अंतिम नोट' में हरियाणा DGP सहित कई उच्च पदस्थ अधिकारियों के नाम थे। एक 31 सदस्यीय समिति नामित अधिकारियों की गिरफ्तारी और हटाने की मांग कर रही है, आरोप है कि प्रारंभिक FIR ने आरोपों को कम कर दिया था। यह मामला उत्पीड़न के आरोपों से जुड़ी हाई-प्रोफाइल आत्महत्याओं की जांच की कानूनी जटिलताओं को उजागर करता है।
मुख्य बिंदु
- SC/ST Act की धारा 3(2)(v) इन समुदायों के सदस्यों के खिलाफ किए गए कुछ अपराधों के लिए आजीवन कारावास निर्धारित करती है।
- मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और आपराधिक साजिश के आरोप शामिल हैं।
- मृतक अधिकारी का 'अंतिम नोट' चल रही जांच में सबूत के एक महत्वपूर्ण टुकड़े के रूप में कार्य करता है।
- सार्वजनिक विरोध और 'महापंचायत' ने FIR में कानूनी आरोपों को मजबूत करने के पुलिस के फैसले को प्रभावित किया।
परीक्षा तथ्य
- SC/ST (Prevention of Atrocities) Act की धारा 3(2)(v)।
- मृतक 2001-बैच के IPS अधिकारी थे।
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