भारत और ऑस्ट्रेलिया रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर करेंगे
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की आगामी ऑस्ट्रेलिया यात्रा भारत-ऑस्ट्रेलिया Comprehensive Strategic Partnership में एक महत्वपूर्ण कदम है। दोनों देश रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर एक नई संयुक्त घोषणा (Joint Declaration) पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार हैं। फोकस के प्रमुख क्षेत्रों में हिंद महासागर में समुद्री डोमेन जागरूकता (maritime domain awareness), हवा से हवा में ईंधन भरने (air-to-air refuelling) की व्यवस्था और उनके सशस्त्र बलों के बीच अंतर-संचालनीयता (interoperability) बढ़ाना शामिल है। ऑस्ट्रेलिया तेजी से भारत को उच्च-स्तरीय रक्षा उत्पादन में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में देख रहा है। इस साझेदारी का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करना और गहरी भागीदारी के माध्यम से दोनों देशों की रणनीतिक स्वायत्तता (strategic autonomy) को बढ़ाना है।
मुख्य बिंदु
- यह यात्रा 2020 में स्थापित भारत-ऑस्ट्रेलिया Comprehensive Strategic Partnership की पांचवीं वर्षगांठ का प्रतीक है।
- हिंद महासागर क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक Maritime Security Road Map विकसित किया जा रहा है।
- भारत और ऑस्ट्रेलिया उच्च-स्तरीय रक्षा उपकरणों के उत्पादन और संयुक्त सैन्य गतिविधियों में भागीदारी बढ़ा रहे हैं।
- यह साझेदारी रणनीतिक स्वायत्तता को बढ़ाती है और हिंद-प्रशांत में दोनों देशों के लिए अधिक सुरक्षा विकल्प प्रदान करती है।
परीक्षा तथ्य
- RAAF KC-30A हवा से हवा में ईंधन भरने के अभ्यास के लिए उपयोग किया जाने वाला मल्टी-रोल टैंकर है।
- Comprehensive Strategic Partnership 2020 में स्थापित की गई थी।
- यह यात्रा 9 और 10 अक्टूबर, 2025 के लिए निर्धारित है।
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