अनुपालन सुनिश्चित करें: घटिया गुणवत्ता वाली दवाएं बनाने वाली कंपनियों को परिणाम भुगतने होंगे

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय दूषित कफ सिरप की रिपोर्टों के बाद सख्त दवा अनुपालन (drug compliance) पर जोर दे रहा है। तमिलनाडु ड्रग्स कंट्रोल विभाग ने Coldrif के नमूनों में diethylene glycol (DEG) और ethylene glycol पाया है, जो राजस्थान और मध्य प्रदेश में बच्चों की मौत से जुड़ा एक कफ सिरप है। ये पदार्थ nephrotoxic और अत्यधिक खतरनाक हैं। Central Drugs Standard Control Organisation (CDSCO) ने कंपनी का मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की है। लेख में 'Make in India' ब्रांड को बनाए रखने और सार्वजनिक स्वास्थ्य को घटिया फार्मास्युटिकल उत्पादों से बचाने के लिए जीरो-टॉलरेंस नीति, कड़ी निगरानी और नियमित औचक निरीक्षण की आवश्यकता पर बल दिया गया है।

मुख्य बिंदु

  • DEG और ethylene glycol युक्त दूषित कफ सिरप भारत में कई बच्चों की मौत से जुड़े हैं।
  • CDSCO ने गुणवत्ता मानकों को पूरा करने में विफल रहने वाली कंपनियों के मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश की है।
  • यह सुनिश्चित करने के लिए कि भारतीय फार्मास्युटिकल उत्पाद वैश्विक Good Manufacturing Practices (GMP) को पूरा करते हैं, संशोधित Schedule M मानदंडों को लागू किया जा रहा है।
  • भारतीय फार्मास्युटिकल क्षेत्र की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए खराब गुणवत्ता वाली दवाओं के प्रति जीरो-थ्रेशोल्ड नीति आवश्यक है।

परीक्षा तथ्य

  • Diethylene glycol (DEG) और ethylene glycol दूषित सिरप में पाए जाने वाले nephrotoxic पदार्थ हैं।
  • CDSCO भारतीय फार्मास्यूटिकल्स के लिए राष्ट्रीय नियामक संस्था है।
  • Drugs and Cosmetics Rules का संशोधित Schedule M, Good Manufacturing Practices (GMP) पर केंद्रित है।

पढ़ें। याद रखें। याद करें।

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