संयुक्त राज्य अमेरिका से आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) मक्के के आयात के प्रति भारत के प्रतिरोध को समझना
भारत और U.S. मक्का आयात को लेकर असहमति में हैं। जबकि U.S. अपने अधिशेष मक्के के लिए बाजार पहुंच चाहता है, भारत Genetically Modified (GM) फसलों के खिलाफ अपनी सख्त नीति के कारण हिचकिचा रहा है। वर्तमान में, भारत केवल GM कपास (cotton) की खेती की अनुमति देता है। GM मक्के का आयात खाद्य श्रृंखला को दूषित करने का जोखिम पैदा कर सकता है। इसके अतिरिक्त, इथेनॉल सम्मिश्रण (ethanol blending) के लिए भारत के जोर ने मक्के की घरेलू मांग बढ़ा दी है, लेकिन सरकार आयात के बजाय स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देने को प्राथमिकता देती है। भारत का लघु-स्तरीय कृषि मॉडल U.S. के बड़े पैमाने के, सब्सिडी वाले औद्योगिक कृषि के बिल्कुल विपरीत है, जिससे भारतीय किसानों के लिए सीधी प्रतिस्पर्धा कठिन हो जाती है।
मुख्य बिंदु
- भारत अपनी जैव विविधता और खाद्य श्रृंखला की रक्षा के लिए GM खाद्य फसलों के आयात पर रोक लगाता है।
- इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम के कारण भारत में मक्के की मांग बढ़ रही है।
- U.S. कृषि अत्यधिक सब्सिडी वाली है और बड़े पैमाने पर औद्योगिक संचालन का प्रभुत्व है।
- भारत ने हाल ही में कमी को पूरा करने के लिए म्यांमार और यूक्रेन से कुछ गैर-GM मक्के का आयात किया है।
परीक्षा तथ्य
- भारत में खेती के लिए अनुमति प्राप्त एकमात्र GM फसल: GM Cotton.
- इथेनॉल सम्मिश्रण लक्ष्य: 2025-26 तक 20%.
- भारत की मक्का उपज: ~3 टन प्रति हेक्टेयर (विश्व औसत: ~6 टन)।
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