अनुसंधान, विकास और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए भारत के सार्वजनिक खरीद नियमों में सुधार
भारत के General Financial Rules (GFR) और Government e-Marketplace (GeM) पोर्टल, हालांकि पारदर्शिता के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, अक्सर कठोर खरीद प्रक्रियाओं के कारण R&D में बाधा डालते हैं। जून 2025 के हालिया सुधारों का उद्देश्य संस्थानों को विशेष उपकरणों के लिए GeM को बायपास करने की अनुमति देना और प्रत्यक्ष खरीद सीमा को बढ़ाना है। लेख आगे के सुधारों का सुझाव देता है, जैसे कि परिणाम-भारित निविदाएं (outcome-weighted tenders), TIFR या IIT जैसे प्रमुख संस्थानों के लिए 'सैंडबॉक्स' छूट, और AI-संवर्धित सोर्सिंग। अमेरिका के SBIR या दक्षिण कोरिया के 'प्री-कमर्शियल प्रोक्योरमेंट' जैसे अंतरराष्ट्रीय मॉडलों का अनुकरण खरीद को लागत-नियंत्रण तंत्र से नवाचार के उत्प्रेरक में बदल सकता है।
मुख्य बिंदु
- कठोर खरीद नियम अक्सर उच्च-तकनीकी अनुसंधान और विकास की विशिष्ट आवश्यकताओं के बजाय लागत-दक्षता को प्राथमिकता देते हैं।
- हालिया सुधार संस्थानों को विशेष उपकरणों के लिए GeM को बायपास करने और प्रत्यक्ष खरीद सीमा को ₹1 लाख से बढ़ाकर ₹2 लाख करने की अनुमति देते हैं।
- लेख 'मिशन-उन्मुख खरीद' (mission-oriented procurement) की वकालत करता है जहाँ राज्य जानबूझकर तकनीकी बाजारों को आकार देता है।
- प्रस्तावित समाधानों में AI-संचालित खरीद सहायक और महंगे उपकरणों की मांग को एकत्रित करने के लिए सह-खरीद गठबंधन शामिल हैं।
परीक्षा तथ्य
- General Financial Rules (GFR)।
- Government e-Marketplace (GeM) पोर्टल।
- प्रत्यक्ष खरीद सीमा में वृद्धि: ₹1 लाख से ₹2 लाख।
- US Small Business Innovation Research (SBIR) कार्यक्रम।
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