सार्वजनिक स्वास्थ्य और महामारी की रोकथाम के रणनीतिक घटक के रूप में गिद्ध संरक्षण
गिद्ध 'प्रकृति के अपशिष्ट प्रबंधकों' के रूप में शवों को तेजी से हटाकर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे एंथ्रेक्स और रेबीज जैसी जूनोटिक बीमारियों का प्रसार कम हो जाता है। 1990 के दशक के बाद से भारत में उनकी आबादी में 95% से अधिक की गिरावट आई है, जिसका मुख्य कारण diclofenac दवा के जहरीले प्रभाव हैं। 'Action Plan for Vulture Conservation (2016-25)' पूरा होने वाला है, जो 'One Health' दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर देता है जो पर्यावरणीय स्वास्थ्य को मानव सुरक्षा के साथ जोड़ता है। गिद्धों की रक्षा करना बीमारी के प्रसार को रोकने और जैव विविधता से जुड़ी स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत करने का एक लागत प्रभावी तरीका है, जिसके लिए Central Asian Flyway में क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता है।
मुख्य बिंदु
- गिद्ध पर्यावरण से रोगजनकों को समाप्त करके सार्वजनिक स्वास्थ्य रक्षकों के रूप में कार्य करते हैं।
- गिद्धों की कमी से जंगली कुत्तों की आबादी में वृद्धि होती है, जिससे रेबीज का खतरा बढ़ जाता है।
- संरक्षण प्रयासों को 'vulture safe zones' बनाने और जहरीली पशु चिकित्सा दवाओं पर प्रतिबंध लगाने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
- प्रवासी प्रजातियों की रक्षा के लिए Central Asian Flyway (CAF) में एक क्षेत्रीय दृष्टिकोण आवश्यक है।
परीक्षा तथ्य
- जनसंख्या में गिरावट: 1990 के दशक से >95%।
- प्राथमिक कारण: Diclofenac (पशु चिकित्सा दवा)।
- वर्तमान नीति: Action Plan for Vulture Conservation (2016-25)।
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