सरकार ने श्रीलंकाई तमिल शरणार्थियों के लिए राहत और स्पष्टता प्रदान करने वाला Immigration Order जारी किया
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने Immigration and Foreigners (Exemption) Order, 2025 अधिसूचित किया है, जो भारत के आव्रजन ढांचे पर स्पष्टता प्रदान करता है। एक महत्वपूर्ण पहलू तमिलनाडु में श्रीलंकाई तमिल शरणार्थियों को जबरन स्वदेश वापसी से सुरक्षा प्रदान करना है, बशर्ते उन्होंने 9 जनवरी, 2015 से पहले प्रवेश किया हो। हालांकि यह आदेश निर्वासन से राहत देता है, लेकिन यह स्वचालित रूप से नागरिकता प्रदान नहीं करता है। कई शरणार्थी अभी भी Citizenship Act, 1955 के तहत 'illegal migrants' के रूप में वर्गीकृत हैं, जो प्राकृतिककरण (naturalization) के लिए एक कानूनी बाधा बनी हुई है। यह आदेश Citizenship Amendment Act (CAA) 2019 से उनके बाहर होने के बाद आया है और इसका उद्देश्य अधिक मानवीय दृष्टिकोण अपनाना है।
मुख्य बिंदु
- 2025 का आदेश विशिष्ट समूहों को भारत में रहने के लिए पासपोर्ट और वीजा आवश्यकताओं से छूट देता है।
- यह उन श्रीलंकाई तमिल शरणार्थियों की रक्षा करता है जो जनवरी 2015 से पहले आए थे, उन्हें जबरन वापस भेजे जाने से रोकता है।
- भारतीय नागरिकता चाहने वाले इन शरणार्थियों के लिए 'illegal migrant' का टैग अभी भी एक कानूनी बाधा है।
- आदेश का उद्देश्य दीर्घकालिक शरणार्थी आबादी के लिए एक संरचित और मानवीय दृष्टिकोण प्रदान करना है।
परीक्षा तथ्य
- आदेश का नाम: Immigration and Foreigners (Exemption) Order, 2025.
- पंजीकरण के लिए कट-ऑफ तिथि: 9 जनवरी, 2015.
- प्रासंगिक कानून: Citizenship Act, 1955 की धारा 5 और 6.
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