तमिलनाडु ने मातृ मृत्यु अनुपात (Maternal Mortality Ratio) में महत्वपूर्ण गिरावट हासिल की, भारत में दूसरे सबसे निचले स्तर पर पहुँचा
तमिलनाडु का मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) 2020-2022 में प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों पर 38 से गिरकर 2021-2023 में 35 हो गया है। यह उपलब्धि राज्य को देश में दूसरे सबसे निचले स्थान पर रखती है, जो केवल केरल और आंध्र प्रदेश से पीछे है, जो दोनों 30 पर हैं। राष्ट्रीय औसत MMR 88 के साथ काफी अधिक है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस सफलता का श्रेय निरंतर प्रयासों, नई पहलों और प्रत्येक गर्भवती महिला की ट्रैकिंग पर ध्यान केंद्रित करने को दिया है। भविष्य की रणनीतियों में एक समर्पित मिडवाइफरी (midwifery) कैडर बनाना और तिरुवन्नामलई और नागपट्टिनम जैसे कम सेवा वाले जिलों में असमानताओं को दूर करना शामिल है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी प्रसव घर पर न हो।
मुख्य बिंदु
- तमिलनाडु का MMR नवीनतम बुलेटिन में तीन अंक घटकर प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों पर 35 हो गया है।
- राज्य अब भारत में दूसरे सबसे निचले स्थान पर है, जबकि केरल और आंध्र प्रदेश 30 के MMR के साथ देश में अग्रणी हैं।
- 2021-2023 की अवधि के लिए राष्ट्रीय मातृ मृत्यु अनुपात 88 है, जो राज्य के बेहतर प्रदर्शन को उजागर करता है।
- प्रस्तावित सुधारों में कम MMR बनाए रखने के लिए 1:1 नर्स-मरीज अनुपात और एक विशेष मिडवाइफरी (midwifery) कैडर का निर्माण शामिल है।
परीक्षा तथ्य
- तमिलनाडु MMR (2021-2023): प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों पर 35।
- भारत का राष्ट्रीय MMR: 88।
- शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्य: केरल और आंध्र प्रदेश (30 का MMR)।
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