केरल में अमीबिक बुखार का प्रकोप: Free-Living Amoebae के कारण, लक्षण और प्रभाव

केरल में amoebic meningoencephalitis के कारण कई मौतों की सूचना मिली है, जो एक दुर्लभ लेकिन घातक मस्तिष्क संक्रमण है। यह बीमारी Naegleria fowleri, Acanthamoeba और Balamuthia mandrillaris जैसे free-living amoebae के कारण होती है, जो आमतौर पर दूषित जल स्रोतों और मिट्टी में पाए जाते हैं। Naegleria fowleri अक्सर गर्म ताजे पानी में तैरने या गोताखोरी के दौरान नाक के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है। वायनाड और कोझिकोड जैसे जिलों में मामलों में हालिया वृद्धि का कारण राज्य के जल निकायों में उच्च जीवाणु संदूषण (bacterial contamination) को माना जा रहा है, जो इन जीवों के विकास को बढ़ावा देता है। स्वास्थ्य अधिकारी स्थिति की निगरानी कर रहे हैं क्योंकि मृत्यु दर काफी अधिक बनी हुई है।

मुख्य बिंदु

  • Primary amoebic meningoencephalitis (PAM) मुख्य रूप से Naegleria fowleri के कारण होता है, जो दूषित पानी में बैक्टीरिया को खाता है।
  • केरल के पानी और मिट्टी में Acanthamoeba और Balamuthia mandrillaris जैसी अन्य रोगजनक प्रजातियों का भी पता चला है।
  • यह संक्रमण अत्यधिक घातक है, सितंबर 2025 की शुरुआत तक केरल में 48 मामलों में से 12 मौतों की सूचना मिली है।
  • जल निकायों में जीवाणु संदूषण इन रोगजनक जीवों की बढ़ती प्रमुखता में एक महत्वपूर्ण कारक है।

परीक्षा तथ्य

  • Naegleria fowleri को आमतौर पर 'brain-eating amoeba' के रूप में जाना जाता है।
  • Integrated Disease Surveillance Programme (IDSP) इस प्रकोप की निगरानी करने वाली नोडल एजेंसी है।
  • संक्रमण आमतौर पर तब होता है जब दूषित पानी नासिका गुहा (nasal cavity) में प्रवेश करता है और मस्तिष्क तक पहुँच जाता है।

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