भारत की रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy): एक बहुध्रुवीय दुनिया और वैश्विक शक्ति परिवर्तनों में नेविगेट करना

शशि थरूर भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' (strategic autonomy) का पता लगाते हैं, जो एक खंडित दुनिया में गुटनिरपेक्षता से 'बहु-संरेखण' (multi-alignment) की ओर विकसित हो रही है। यह रणनीतिक स्वायत्तता को बाहरी बाधाओं के बिना संप्रभु विदेश नीति और रक्षा निर्णय लेने की क्षमता के रूप में परिभाषित करता है। भारत को अमेरिका, चीन और रूस के बीच एक नाजुक संतुलन का सामना करना पड़ रहा है। जबकि Quad और iCET के माध्यम से अमेरिका के साथ संबंध परिपक्व हुए हैं, भारत यूक्रेन संघर्ष के बावजूद रूस के साथ ऐतिहासिक संबंध बनाए रखता है। लेख इस बात पर जोर देता है कि रणनीतिक स्वायत्तता के लिए आर्थिक शक्ति, तकनीकी क्षमता और राजनीतिक सुसंगतता की आवश्यकता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि भारत 'पश्चिम-विरोधी' (anti-West) के बजाय 'गैर-पश्चिम' (non-West) शक्ति बना रहे।

मुख्य बिंदु

  • रणनीतिक स्वायत्तता भारत को कठोर गुटों में शामिल होने के बजाय अपनी शर्तों पर कई शक्तियों के साथ जुड़ने की अनुमति देती है।
  • Quad, i2U2 और India-Middle East-Europe Economic Corridor (IMEC) जैसी पहलों के माध्यम से अमेरिका के साथ भारत के संबंध परिपक्व हुए हैं।
  • पश्चिमी दबाव के बावजूद, भारत रक्षा और ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस के साथ अपनी ऐतिहासिक और रणनीतिक साझेदारी बनाए रखता है।
  • आधुनिक युग में वास्तविक स्वायत्तता डेटा संप्रभुता (data sovereignty), डिजिटल बुनियादी ढांचे और आपूर्ति श्रृंखला सुरक्षा तक विस्तारित होनी चाहिए।

परीक्षा तथ्य

  • Quad समूह में ऑस्ट्रेलिया, जापान, भारत और U.S. शामिल हैं।
  • i2U2 पहल में भारत, इज़राइल, UAE और U.S. शामिल हैं।
  • IMEC का अर्थ India-Middle East-Europe Economic Corridor है।

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