भारत के Supreme Court में महिला जजों के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता
Supreme Court की 34 जजों की स्वीकृत संख्या के बावजूद, लिंग असंतुलन बना हुआ है, जिसमें Justice B.V. Nagarathna वर्तमान में एकमात्र महिला जज हैं। ऐतिहासिक रूप से, 1950 से अब तक शीर्ष अदालत में केवल 11 महिलाओं को नियुक्त किया गया है, जो कुल 287 जजों का मात्र 3.8% है। लेख Collegium के चयन मानदंडों में लैंगिक प्रतिनिधित्व को संस्थागत बनाने का तर्क देता है। यह इस बात पर प्रकाश डालता है कि विविधता अद्वितीय दृष्टिकोण लाती है और सार्वजनिक विश्वास बढ़ाती है। Collegium प्रणाली में पारदर्शिता की कमी और 'वरिष्ठता' के तर्क को महिला नियुक्तियों में बाधा के रूप में उद्धृत किया गया है।
मुख्य बिंदु
- Justice B.V. Nagarathna 2027 में भारत की पहली महिला Chief Justice of India (CJI) बनने वाली हैं, लेकिन केवल 36 दिनों के लिए।
- केवल पांच महिलाएं कभी Supreme Court Collegium का हिस्सा रही हैं, जिनमें से केवल तीन नियुक्तियों में शामिल थीं।
- न्यायपालिका में विविधता में लिंग, जाति, धर्म और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व शामिल होना चाहिए ताकि यह वास्तव में समावेशी हो सके।
- लेख उच्च न्यायपालिका में लैंगिक प्रतिनिधित्व को अनिवार्य बनाने के लिए एक लिखित नीति का आह्वान करता है।
परीक्षा तथ्य
- Supreme Court of India की स्वीकृत संख्या 34 जज है।
- Justice Fathima Beevi Supreme Court की पहली महिला जज थीं, जिन्हें 1989 में नियुक्त किया गया था।
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